10वीं की छात्रा ने गरीब बच्चों के लिए खुद के पॉकेटमनी से खोली लाइब्रेरी, 35 बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ सकते हैं

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10th Student Ishani Agrawal from Delhi Opened Library for poor Childrens

आज का समय ऐसा हैं जहा पढ़ाई का महत्व काफी बड़ चुका हैं जहा किसी भी इंसान को बिना पढ़े लिखे नौकरी नहीं मिलती। क्युकी वर्तमान में शिक्षा इतनी महत्वपूर्ण हो चुकी हैं की किसी भी क्षेत्र में जाने के लिए सबसे पहले हमे शिक्षा प्राप्त करनी होती हैं इसी वजह से हर माता–पिता बचपन से ही अपने बच्चो को पढ़ने के लिए बोलने लगते है। क्युकी हर माता–पिता अपने बच्चे को कामयाबी करता देखना चाहता है वही जो दूसरी तरफ जहा आज के स्कूल में दाखिले की फीस काफी उचाईयां छू रही है जहा गरीब माता–पिता अपने बच्चो को नही पढ़ा पाते। जिस कारण देश में कही ऐसे बच्चे है पढ़ाई से वंचित रहते है। और यह देश के लिए सबसे बड़ा मुदा बन चुका है की गरीब बच्चो के लिए सरकार कही तरह के स्कूल खोल रही है वे साथ ही साथ कही तरह की सुविधाएं दे रही हैं जिससे हर गरीब बच्चे पढ़ाई कर पाए और कामयाबी को हासिल करे। लेकिन सरकार के साथ देश के लोगो को भी इसके लिए जागरूक होना पढ़ेगा। जिसके लिए लोगो को भी कही तरह की सुविधाएं गरीब बच्चो को दे कर उनको शिक्षा दे सकते हैं। लेकिन आज एक ऐसी उम्र जिस उम्र में बच्चे अपने माता–पिता से मिली पॉकेट मनी को अपने खाने की चीज में लगा देते है। क्युकी ये उम्र ऐसी उम्र है जिसमे बच्चे खेलना कूदना पसंद करते है वे समय ऐसा समय होता है जहा बच्चो को बाहर की काफी जानकारी नहीं होती।

आज एक ऐसी बच्ची जो 10 वी कक्षा में पढ़ती है जिसकी उम्र सिर्फ 15 साल है जिसने आज इस मुद्दे को काफी समझा और उन बच्चो के लिए कुछ करना चाह जो चाहते हुए भी पढ़ाई नही कर पा रहे। तो आज के समय में इस बच्ची ने कुछ ऐसा किया जिसे सुन आप काफी हैरान रह जाएंगे। क्युकी इस बच्ची ने अपने माता–पिता से मिली पॉकेट मनी को जोड़ कर उन बच्चो के लिए लाइब्रेरी खोली। जिसमे पढ़ाई कर वो अपनी सफलता को हासिल कर सके।

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**जानते हैं इस बच्ची के बारे में……..

आज हम जिस बच्ची की बात कर रहे है उसका नाम इशानी अग्रवाल (Ishani Aggarwal) हैं जो दिल्ली (delhi) में रहने वाली है जिसकी उम्र सिर्फ 15 साल है। परिवार की बात की जाए तो इशानी के पिता किसी निजी स्कूल में डायरेक्टर की पद पर है और मां हाउसवाइफ है। इशानी पढ़ाई को लेकर काफी रुचि रखती है जिस उम्र में बच्चे खेलना कूदना वे पढ़ना जानते है लेकिन आज इशानी ने छोटी सी उम्र में ऐसा काम कर दिखाया। जिसके बारे में बड़ो ने भी कभी नही सोचा होगा। क्युकी इशानी जो खुद 10 वी की कक्षा में पढ़ रही है जिसने बिना किसी का साथ लिए और अपने माता –पिता द्वारा मिली हुई पॉकेट मनी से एक ऐसी लाइब्रेरी का निर्माण किया, जहा गरीब बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकते है

10th Student Ishani Agrawal from Delhi Opened Library for poor Childrens

**कैसे आया इस बच्ची के मन में लाइब्रेरी खोलने का ख्याल……

इशानी अग्रवाल (Ishani Aggarwal) जो खुद पढ़ रही है लेकिन इस बच्ची ने आज उन बच्चो के बारे में सोचा। जिन बच्चो के पास शिक्षा प्राप्त करने का कोई साधन नहीं है जो काफी गरीब परिवार से तालुक रखते हैं। इशानी का कहना है की वह अपने स्कूल के एक टूर पे राजस्थान गई थी जिस जगह उन्होंने काफी ऐसे छोटे बच्चो को देखा जो पढ़ना तो चाहते है लेकिन उनके पास पढ़ने का कोई साधन नहीं है क्युकी हम सब जानते है की गरीब माता –पिता अपने बच्चो की फीस भरने में सक्षम नहीं हैं। जिसके बाद उस बच्ची ने कुछ ऐसा करना चाह। जिससे हर बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सके। जिसके बाद वह अपने फैसले पर कायम रही और उसके लिए अपनी मिली पॉकेट मनी को इक्ट्ठा करने लगी। जिसमे इशानी ने 1.50 लाख रकम इकठ्ठी की वो भी बिना अपने माता –पिता के सहयात के जिसके बाद उन्होंने उन्होंने गाजियाबाद के डासना इलाके में लाइब्रेरी का निर्माण किया।

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**प्रशासन का मिला सहयोग……

इस छोटी सी बच्ची का इतना बड़ा योगदान देख कर। लोग बच्ची की काफी प्रशंसा कर रहे हैं क्युकी आज इस बच्ची ने हर व्यक्ति को अपनी सोच से प्रेरित किया है। इस बच्ची को जब लाइब्रेरी खोलने में जगह की दिक्कत आ रही थी तब एमडीएम प्रशासन ने बच्ची का साथ दिया। उन्होंने गाजियाबाद के डासना इलाके में 15 साल से खाली पड़ा बारात घर को किताब घर (Library) में बदलने का आदेश दिया। क्युकी एक छोटी सी बच्ची का इतने बड़े योगदान में उन्होंने भी कुछ ऐसा करना चाह। जिससे देश की तरक्की हो। इशानी ने लाइब्रेरी में बच्चो की पढ़ने के लिए जगह बनवाई जिसमे उन्होंने 35 बच्चो की बैठने की जगह को तैयार किया और हर किताबो का इंतजाम किया। जिससे हर बच्चा शिक्षा ग्रहण कर सके।

**प्रेरणा…..

आज इस छोटी बच्ची ने अपने द्वारा किए हुए फैसले को पूर्ण किया और यह साबित किया की उम्र कोई भी हो अगर कोई व्यक्ति कुछ करने की ठान लेता हैं तो वो आई हर परिस्थिति का सामना कर अपनी सफलता को हासिल कर लेता है। आज इशानी ने अपना योगदान शिक्षा में दिया जहा वे चाहती थी की हर बच्चा शिक्षा ग्रहण करे।

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