स्कूल जाने के लिए बच्चों को पार करना पड़ता था 1km लम्बा तालाब तो महिला ने शुरु कर दिया मुफ्त नाव सेवा

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19 year old kanta of Maharastra started free boat Service for children

हमारी जीवन में शिक्षा काफी महत्व रखती हैं क्युकी शिक्षा एक मात्र ऐसा ज्ञान हैं जो हमे हमारी कमायाबी हासिल करने में सहायता करती हैं। कहते है न “पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब” “खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब” यह कहावत सोला आने सच हैं क्युकी अगर बच्चे अपनी पढ़ाई छोड़ सारा दिन खेल कूद में अपना दिन निकलेंगे तो जिससे वह बिलकुल नहीं पढ़ पाएंगे। जिससे आज जा कर उन्हे अपनी जिंदगी में काफी समस्या का सामना करना पड़ेगा। इसलिए हर माता–पिता अपने बच्चो को बचपन से ही उच्च शिक्षा देने की शुरुवात कर देते हैं लेकिन आज के समय में कही बच्चे शिक्षा का महत्व भूल चुके हैं क्युकी उन्हे लगता है को पढ़ाई आज के समय में सिरदर्द बन चुकी हैं लेकिन हर बच्चे को शिक्षा का महत्व जानना काफी आवश्यक हैं जिससे वो एक उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके।

आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताएंगे। जिसने आज बच्चो की स्कूल आने जाने की मुश्किल को समझा। जिसकी उन्होंने सहयाता कर बच्चो की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी और ऐसा काम किया जिससे उनकी आज हर कोई तारीफ कर रहा हैं।

**जानते हैं उस लड़की के बारे में…….

आज हम जिसकी बात कर रहे है उसका नाम कांता चिंतामन (Kanta Chintaman) है जो मुंबई के ठाणे जिले के पाड़ा गांव से तालुक रखती है। जिसने एक समय पर ऐसा समय देखा था जहा इन्होंने अपनी पढ़ाई में आई बाधा की वजह से अपनी पढ़ाई को छोड़ दिया। कांता चिंतामन जिन्होने 9वी कक्षा के बाद संसाधनों की कमी होने के कारण अपनी पढ़ाई को वही छोड़ दिया था। जिस बात को ले कर वह आज तक इस बात के लिए तरसती आई है की उन्हे भी पढ़ाई करनी थी। लेकिन वे पढ़ाई नही कर पाई।

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**बच्चो को आती थी स्कूल आने जाने में समस्या……..

जैसे की हमने आपको बताया की कांता जो मुंबई के पाड़ा गांव की रहने वाली है हम सब जानते है की गांव में कही ऐसी चीजे होती ही जिसकी सुविधा बिलकुल नहीं होती। क्युकी शहर के मामले में गांव में संसाधनों की बेहद कमी होती हैं जिसकी वजह से गांव में रहने वाले लोग को कही तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं। इसी तरह कांता के गांव में भी संसाधनों की कमी थी जिसकी वजह से स्कूल जाने के लिए बच्चो को आने जाने में कही तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ रहा था। कांता का कहना था की स्कूल जाने के लिए बच्चो को 1 किलोमीटर तालाब पर कर सड़क पर जाना पड़ता था। जिस कारण कही बच्चे अपनी शिक्षा को बीच में ही छोड़ दिया करते थे।

**बच्चो की पढ़ाई में नही आने दी बाधा…….

जन कांता ने इस चीज को देखा की बच्चो को शिक्षा लेने में कही तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है जिसकी वजह से बच्चे अशिक्षित हो रहे हैं यह सब देख कांता को अपना समय याद आया। की उन्हे भी मुश्किलों की वजह से शिक्षा को बीच में छोड़ना पड़ा। जिसका एहसास आज भी उन्हे है। लेकिन उन्होंने यह सब देख मन ही मन ठान लिया था की वो बच्चो की शिक्षा में किसी भी प्रकार की कोई बाधा नहीं आने देगी। जिसके लिए वो कुछ भी करेंगी।

**बनी बच्चो के लिए सहरा…….

मन ही मन ठान की बाद। उन्होंने कुछ ऐसा करना चाह। जिससे बच्चे आराम से अपने स्कूल पहुंच कर शिक्षा प्राप्त कर सके। जिसके बाद उन्होंने एक नवी को तैयार किया। जिसमे बच्चे बैठ कर अपने स्कूल समय पर पहुंच पायेंगे और किसी भी बच्चो को आने जाने में कोई दिक्कत नही होगी। इस नाव में खास बात यह थी की कांता इस नाव को खुद चला कर बच्चो को स्कूल छोड़ने और लाने का काम करती थी।

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**कोई सुविधा नही इस गांव में……

मुंबई का पाड़ा गांव जहा लोग कही तरह की मुश्किलों का सामना कर रहें हैं क्युकी इस गांव में कोई भी सुविधा सही तरीके से उपलब्ध नहीं हैं जिस वजह से इस गांव की लोग कही सुविधाओ से वांछित हैं लेकिन कांता जो खुद तो किसी कारण शिक्षा नही प्राप्त कर पाई। लेकिन उन्होंने बच्चो की शिक्षा में बिलकुल भी बाधा नहीं आने दी। क्युकी उनका कहना है की पड़ेगा इंडिया तभी तो बड़ेगा इंडिया। आज कांता इस गांव को हर वो सुख सुविधा दिलवाने का काम कर रही जिसके लिए यह कही तरह के संघर्ष कर रही हैं।

**प्रेरणा…..

कांता जिन्होने खुद शिक्षा प्राप्त नहीं की। लेकिन आज वो हर उन बच्चे की सहयाता कर रही है जो शिक्षा से वांछित हो रहे। क्युकी कांता का कहना है की उन्होंने आज भी अपनी पढ़ाई छोड़ने का एहसास है जिस वजह से आज वो हर बच्चे को उच्च शिक्षा दिलाने का काम कर रही हैं जिससे हर बच्चा अपना भविष्य बना सके और अपनी जिंदगी में कामयाबी हासिल कर सके। आज कांता कही लोगो के लिए प्रेरणा बनी और हर किसी को यह सीख दी को जीवन में शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व हैं।

5 COMMENTS

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