अन्तिम पंघाल बनी U20 चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला रेसलर

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Antim Pnaghal Become India's first women wrestler to win gold medal in U20 championship

भारत देश वर्तमान में कही तरह की तरक्की कर चुका हैं वक्त के साथ साथ भारत देश में कही तरह के बदलवा ले गए। जिससे सबसे बड़ा बदलाव महिलाओ को एक नई पहचान मिली। जहा एक वक्त ऐसा था की महिलाओ को किसी भी तरह का कोई भी काम करने की अनुमति नही थी जहा पैदा होते ही लड़कियो को हत्या कर दी जाती थी। क्युकी लोगो का मानना था की लड़किया माता–पिता के सिर पर बोझ है। लेकिन आज हर लड़की अपनी एक अलग पहचान बना कर हर क्षेत्र में लड़को से आगे निकल रही हैं आज वर्तमान में कोई भी ऐसा काम नही है जिसमे लड़किया लड़को से पीछे है वक्त के बदलाव के साथ साथ लोगो ने अपनी सोच को भी बदला है जहा आज लड़के लड़की को एक समान दर्जा दिया जाने लगा हैं और आज लड़किया भी अपने देश का और परिवार का नाम गर्व से ऊंचा कर रहीं हैं।

आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कहानी बताएंगे। जो आज हर लड़कियो के लिए प्रेरणा बनी। जिसने अपने माता पिता का नाम गर्व से ऊंचा कर भारत में इतिहास रच दिया।

**जानते हैं इस लड़की के बारे में……

आज हम जिसके बारे में आपको बताएंगे उनका नाम अंतिम पंघाल (Antim Panghal) है जो हरियाणा (Haryana) के भागना से तालुकात रखती है अंतिम के परिवार की बात की जाए तो इनके परिवार में यह चार बहने है और माता पिता। पिता का नाम रामनिवास पंघाल (Ramniwas Panghal) है वे माता का नाम कृष्णा कुमारी (Krishna Kumari) है अंतिम जो चारो बहनों में से सबसे छोटी है जिसने आज 17 साल की उम्र में इन्होंने इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों से दर्ज करवाया। दरअसल आपको बता दे की बुल्गारिया के सोफिया में अंडर-20 वर्ल्ड चैम्पियनशिप का आयोजन चल रहा हैं जिसमे कही देशों के खिलाड़ियों ने भाग ले कर अपना टैलेंट दिखया। उसमे से अंतिम ने भी हिस्सा लिया था जिसके बाद उन्होंने 17 साल की उम्र में भारत को गोल्ड मेडल हासिल करवाया। जिसके बाद वह भारत को पहली रेसलर वूमेन बनी।

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**किस तरह रखा गया अंतिम का नाम…….

हमारे भारत में हर माता पिता की चाह होती है की उनके घर बेटा जन्म ले। क्युकी उनका मानना होता है की बेटा बुढ़ापे की लाठी होता हैं ऐसे में अंतिम के परिवार में 3 बेटियां पहले से ही थी। जिसके बाद चौथी बार भी उनके घर बेटी ने ही जन्म लिया। जिसके बाद अंतिम के माता–पिता और बेटी नही चाहते थे जिस कारण उन्होंने अपनी चौथी बेटी का नाम ही अंतिम रख दिया। लेकिन आज वही अंतिम अपने माता पिता का बेटा बन उनका नाम गर्व से ऊंचा कर रही है। जिसमे आज सबको यह बताया की बेटियां भी बेटो को तरह अपने माता पिता का नाम रोशन कर सकती हैं।

Antim Pnaghal Become India's first women wrestler to win gold medal in U20 championship

**अन्य खिलाड़ियों को चटाई धूल…….

आज अंतिम पंघाल ने हर किस के आगे यह बात को साबित किया हैं की लड़की चाहे तो किसी भी मुश्किल का सामना कर सकती है अंतिम पंघाल जिसने 17 साल की उम्र में ऐसा काम किया की सभी देशों के हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को अंतिम ने अपने आगे टिकने नहीं दिया और हर खिलाड़ी को धूल चटाकर अपने नाम गोल्ड मेडल किया।

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**भारत में रेसलिंग में जीते गए कही गोल्ड मेडल……

हमारा भारत जो हर चीजों में हमेशा से आगे रहा हैं जहा हर किसी न किसी के अंदर कोई न कोई टैलेंट कूट कूट कर भरा हुआ हैं कोई फैशन में आगे हैं तो कोई खेल में। हमारे भारत के अंदर हरियाणा शहर जिसमे रेसलर के बेहतरीन खिलाड़ी है। आज अंतिम ने तो रेसलिंग में गोल्ड पदक हासिल किया साथ है ऐसे खेल जैसे अंडर-20 वर्ल्ड चैम्पियनशिप (Under-20 World Championship), CWG 2022 जिसमे कही खिलाड़ी ने कही गोल्ड पदक को हासिल किया। देखा जाए तो हमारा भारत खेलो में और कृषि क्षेत्र में हमेशा आगे रहा हैं क्युकी भारत में लोग मन से नही दिल से एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं। अगर ऐसे ही भारत के खिलाड़ी रेसलर मैं पदक हासिल करते रहे तो वो दिन दूर नही जब भारत में रेसलिंग खेल काफी खेला जाएगा।

**क्यों बनाना चाहती थी रेसलर…….

जैसे की हमने आपको बताया की अंतिम और चार बहने थी। जिसमे से अंतिम सबसे छोटे नंबर पर आती थी। अंतिम की एक बड़ी बहन जो कबड्डी की खिलाड़ी थी। जो हमेशा से चाहती थी की इसकी बहन अंतिम रेसलर की खिलाड़ी बन और उसका इतिहास रच भारत में अपना नाम रोशन करे। क्युकी उसको बहन चाहती थी की अंतिम यह सब कर के लोगो को सीख दे की लड़किया भी लड़को से कम नहीं है आज कोई भी काम ऐसा नहीं है जो लड़किया नही कर सकती। जिसके बाद अपनी बहन की बातो से उन्होंने रेसलर बनाना चाह और अपना कदम रेसलिंग में रखा।

**प्रेरणा…..

अंतिम ने हर उस लड़की को प्रेरित किया जो समाज से डर कर अपने सपने को अपने अंदर दफन कर लेती हैं आज अंतिम ने सबको बताया की आज कोई काम ऐसा नहीं है जो सिर्फ पुरुष कर सकते । हर क्षेत्र में लड़किया अपने नाम के झंडे गाड़ रही हैं।

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