बेस्ट किसान अवॉर्ड सहित कई अवार्डों से हुए सम्मानित तेलंगाना के वीर शेट्टी, कई लोगो को दे रहे है रोजगार-जानें कैसे

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veer shetty

आपको किसी भी चीज़ की जरूरत कब महसूस होती है जब वो आपके पास ना हो या, आप उसे नही पा सकते है। तब आपको किसी भी चीज़ की अहमियत समझ में आती है। और ये भी सत्य है कि जब तक वो आपपे खुद ना बीते आप इसका अंदाजा नही लगा सकते है। तो आइए आज आपको ऐसे ही शख्स की कहानी बताते है जिन्हें खुद भूखा रहना पड़ा। तब जाने उन्हें खाने की अहमियत समझ मे आयी।

आज कल हमारे देश मे या हमारे अपने शहर में हमारे देश के खाने की चीज़ें कम और विदेशी चीज़े अधिक दिखती है। जिसका दोतरफा नुकसान है हमारे किसान भाई को और खाने वाले कि सेहत को भी। परन्तु आज भी कुछ ऐसे इंसान है जो अपने देश की पोष्टिक चीज़े उपजा भी रहे है और उन्हें देश-विदेश तक पहुँचा भी रहे है तो आइए जानते है एक ऐसे ही इंसान के बारे में ।

वीर शेट्टी का परिचय:-

वीर शेट्टी तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के गंगापुर निवासी है। वीर अपने तीनो भाईओ में सबसे बड़े है। 10 वी पास करते ही वीर के उपर अपने घर की जिम्मेदारी आ गयी। अपना घर चलाने के लिए वीर ड्राइवर का भी काम करते थे।

वीर बहुत मेहनती थे इसलिए वो काम के साथ-साथ पढ़ाई भी करते थे। काम करने के साथ साथ वीर ने अपना बीए पूरा किया। वीर एक साधारण परिवार से आते है उन्हें सारे चीज़ो की अहमियत थी परन्तु उन्हें खाने की असली अहमियत तब समझ मे आयी जब वो किसी काम से महाराष्ट्र गए थे।

मुसीबतों से सिख लिया:-

जब भी कोई मुसीबत किसी के जिंदगी में आती है तो वो अच्छी बुरी दोनो चीज़े सिखाती है हमे ये हमारे ऊपर है की हमे क्या सीखना है।जब वीर महाराष्ट्र आये तब कुछ ऐसा संयोग बना की उन्हें खाने के लिए एक दाना भी नही मिला।भूखे ही वीर अपने घर गए। परन्तु जो भूख उन्होंने महसूस किया था वो अभी भी भूले नही थे।इसलिए वीर ने ये तय किया कि वो कुछ ऐसा करेंगें जिससे कभी भी किसी को भूखा नही रहना पड़े।

स्वास्थ को भी रखा ध्यान में:-

वीर शेट्टी लोगो का पेट भरने के साथ-साथ सबको स्वस्थ भी रखना चाहते थे । परन्तु उन्हें समझ नही आ रहा था कि वो किस चीज़ की खेती करें। परन्तु वीर शेट्टी अपने फैसले पर अडिग रहे और 2005 से ज्वार उगाना शुरू किया।

2007 में महाराष्ट्र में वीर ने एक छोटी से दुकान खोली और ज्वार की रोटी बेचना शुरू किया।ज्वार की रोटी का मूल्य वीर ने अधिक नही रखा था और ये स्वास्थ के लिए भी सेहतमंद था।परंतु उस समय लोग ज्यादा ज्वार और बाजरे की रोटी खाना नही चाहते थे।इसलिए वीर को अधिक सफलता नही मिली फिर भी वीर ने हार नही मानी।

एस एस भावनी फ़ूड रेस्टुरेंट खोला:-

वीर शेट्टी ने दूसरी जगह अपनी दुकान खोली और उसका नाम एस एस भवानी फ़ूड रेस्टुरेंट रखा। वीर को ग्राहक भी मिलने लगे। जसमे अधिकतर डाइबिटीज के मरीज होते थे। वीर ज्वार और बाजरे की रोटी भी बेचते साथ ही साथ लोगो को इसका लाभ भी बताते थे। वीर ने अपना काम जारी रखा।

डिज़ाइन की मशीन:-

वीर शेट्टी ने खुद की लगन से रोटी बनाने वाली मशीन डिज़ाइन की जिससे की एक घंटे में आप 500 रोटियां बना सकते है। वीर के दुकान पर हर दिन 2000 से 3000 तक रोटियों की बिक्री होती थी। वीर यही नही रुके उन्होंने सुखी रोटी बनानी शुरू की जो 6 महीने तक खाने लायक रहती हैं साथ ही साथ इसे विदेश में भी पहुँचाना शुरू कर दिया।

विदेश भेजते है सुखी रोटियां:-

वीर हर महीने 2000 रोटियां ऑस्ट्रेलिया भेजते है और 500 पूरनपोली दुबई। और ये सब वीर बाजरे से ही बनाते है। वीर शेट्टी की कंपनी हुड्डा कॉलोनी,चंदननगर हैदराबाद,तेलंगाना जैसे छेत्रो में है और वीर ने उन सब कंपनी का नाम भवानी फूड्स सेन्टर ही रखे हैं।

वीर की सात साल की मेहनत रंग लाई और आज वीर की कंपनी ज्वार,बाजरा,फ़ॉक्सटेल बाजरा और फिंगर बाजरा के मिश्रण से बने हुए 60 से अधिक खाध पढर्थो का उत्पादन करती है।

गांव के किसान भी हुए प्रोत्साहित:-

वीर शेट्टी ने इस सोच के साथ काम शुरू किया वो 100 युवओं को रोजगार देंगे।साथ ही साथ अपने छेत्र के किसानों की मदद करने के लिए उन्होंने ये पूरी कोशिश की की उनके छेत्र के किसानों को अपने फसल के लिए उचित मूल्य मिले।इसी अच्छी सोच के साथ वीर शेट्टी ने 2016 में किसानों के साथ काम करने के लिए स्वयं शक्ति एग्री फाउंडेशन शुरू किया।

कई गांव के किसानों को जोड़ा:-

वीर की संस्था एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के साथ जुड़ी।जो संस्था कोरापुट जिले के 500 किसानों को ये सिखाती है कि बाजरे के खाध पदार्थ जैसे-लड्डू,सेवइयां, रोटी और चिवड़ा कैसे बनाये जाते है।साथ ही साथ इन किसानों को ये भी सिखाया जाता है की बाजरे के फसल के लिए क्या करना चाइये और क्या नही।

इसी प्रकार वीर की संस्था भी सांगारेड्डी जिले के आठ गांव के लगभग 1000 किसानों से जुड़ी है।इन सारे किसानों की ये समस्या थी कि इन्हें बाजरे के बीज खरीदने के लिए शहर जाना पड़ता था उसमें भी उन्हें सही बीज की पहचान नही थी।परन्तु वीर की संस्था ने इन किसानों के घर पे अच्छे क्वालिटी के बीज पहुँचाना शुरू कर दिया।

किसानों को करते है जागरूक:-

इन सब के साथ ही वीर सभी किसानों को जागरूक भी करते है की उनके फसलों का उचित मूल्य क्या है।वीर उन सभी लोगो के पास बाजरे के खाध पदार्थ पहुँचाना चाहते है जो पौष्टिक खाना खाना चाहते है।इसके साथ ही वीर किसानों की हालत भी सुधाराना चाहते है क्योंकि वीर का कहना है कि भविष्य में बाजरा सुवर फ़ूड बनने वाला है।ये स्वास्थ के लिए फायदेमंद है और इसे उपजाना भी आसान है।

नुकसान भी कम है:-

बाजरे के फसल को चिड़ियों से भी कम नुकसान है।साथ ही साथ बाकी फसलों की तुलना में बाजरे की फसल बर्बाद होने ही बहुत ही कम संभवना है।क्योंकि इसमें कीटो का हमला कम होता है। वीर भी जय जवान,जय किसान नारे के साथ चलते है।इसी सोच के साथ वीर आगे बढ़ते चले जा रहे है जिससे किसानों को भी बहुत फायदा मिल रहा है।

बेस्ट फार्मर अवार्ड से हुए सम्मानित:-

वीर को एमएस स्वामीनाथन के फॉउंडेशन के द्वारा 2017 में बेस्ट फार्मर अवार्ड से सम्मनित किया गया।इसके साथ ही 2017 में ही तेलंगाना स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जयशंकर द्वारा डॉ. एमवी राव मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया।इसके बाद हैदराबाद के इंडियन इंसिटीटूट ऑफ मिलेट रिसर्च से भी उन्हें बेस्ट मिलेट मिशारयया अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।

मिलेट मैन का मिला खिताब:-

इतने सारे पुरुस्कारों के बाद वीर शेट्टी को एक नाम उपलब्धि के रूप में मिली है।लोग उन्हें”मिलेट मैन”के नाम से भी पुकारते है।वीर शेट्टी आज बाजरे के खाध पदार्थ बनाने के अलावा खेती से 3-4 लाख रुपए कमाते है।वीर ने भविष्य के लिए बाजरे से रेडी तो ईट खाध पदार्थ तैयार करने के बारे में सोच रहे है।जिसे वो देश-विदेश के लोगो तक पहुँचा सके।

Kheti trend वीर शेट्टी की मेहनत की तारीफ करता है इसके साथ ही उन्होंने जो किसानों के लिए किया है और युवओं को रोजगार दिया है इसके लिए उनकी सराहना करता है साथ ही साथ उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं भी देता है।

अनामिका बिहार के एक छोटे से शहर छपरा से ताल्लुकात रखती हैं। अपनी पढाई के साथ साथ इनका समाजिक कार्यों में भी तुलनात्मक योगदान रहता है। नए लोगों से बात करना और उनके ज़िन्दगी के अनुभवों को साझा करना अनामिका को पसन्द है, जिसे यह कहानियों के माध्यम से अनेकों लोगों तक पहुंचाती हैं।

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