इस नई तकनीक की मदद से ट्रे में ही उगा सकते हैं पशुओं के लिए चारा, देखें वीडियो

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By hydroponic method farmers are growing fodder without soil at low cost

कृषि आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है क्योंकि यह खेती और पशुपालन के माध्यम से उत्पादों जैसे भोजन, खाद्य, फाइबर और कई अन्य वांछित उत्पादों का उत्पादन करने की प्रक्रिया है। पहले के समय में किसानों को खेत में हरा चारा उगाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी, परंतु अब समय बदल चुका है। अब पशुपालक एक ट्रे में भी चारा उगा सकते हैं। यह चारा खेत में उगे चारे से ज्यादा पौष्टिक भी होता है। – By hydroponic method farmers are growing fodder without soil at low cost.

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बिना मिट्टी के ही सात से दस दिन में उगा सकते है चारा

दुधारू पशुओं को खिलाने के लिए किसानों को चारे और हरे घास की जरूरत पड़ती है। इसके लिए विकल्प के रूप में हाइड्रोपोनिक विधि (Hydroponic Method) से उगाए गए चारे को इस्तेमाल कर सकते हैं। एक ट्रे में बिना मिट्टी के ही चारा सात से दस दिनों में ही उगकर तैयार हो जाता है। इस तकनीक के मदद से चारे को किसी भी मौसम में लगाया जा सकता है।

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हाइड्रोपोनिक विधि से उगाए गए चारे में 40 फीसदी ज्यादा पोषण होता है

हाइड्रोपोनिक विधि के अनुसार उगाए गए हरे चारे से दूधारू पशुओं का दूध और बढ़ जाता है क्योंकि इसमें ज्यादा पोषक होता है। आपको बता दे कि आम हरे चारे की तुलना में इसमे 40 फीसदी ज्यादा पोषण होता है। चारा अनुसंधान संस्थान झांसी के वैज्ञानिक डॉ. राजीव अग्रवाल हाइड्रोपोनिक तकनीक के बारे में बताते हैं कि पौधे उगाने की यह तकनीक पर्यावरण के लिए काफी सही होती है।

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कम पानी में उगाए जा सकते हैं पौधे

हाइड्रोपोनिक विधि की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमे पौधों के लिए कम पानी की जरूरत होती है, जिससे पानी की बचत होती है। कीटनाशकों के भी काफी कम प्रयोग की आवश्यकता होती है। मिट्टी में पैदा होने वाले पौधों और इस तकनीक से उगाए गए पौधों की पैदावार में काफी अंतर होता है। इस तकनीक के मदद से एक किलो मक्का से पांच से सात किलो चारा दस दिन में बनता है तथा इसके लिए जमीन की जरूरत भी नहीं पड़ती। – By hydroponic method farmers are growing fodder without soil at low cost.

वीडियो देखें –

चारे उगने के बाद इस तरह से करे उसे तैयार

डॉ. राजीव अग्रवाल (Dr. Rajeev Agarwal) बताते हैं कि हाइड्रोपोनिक विधि से हरे चारे उगाने के बाद उस मक्के को 24 घंटे के लिए पानी में भिगो कर छोड़ दे। 24 घंटे बाद उसे पानी से निकाल कर एक ट्रे में डाल कर जूट के बोरे से ढक दे। डॉ. राजीव के अनुसार तीन दिनों तक इसे ढके रखने पर उसमें अंकुरण हो जाता है। फिर उसे पांच ट्रे में बांट देना होता है। इसके लिए जरूरी है हर दो-तीन घंटे में पानी डालते रहना।

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हाइड्रोपोनिक तकनीक में किसानों को नहीं करनी पड़ती ज्यादा मेहनत

पानी डालने से पहले ट्रे में छेद जरूर करे, इससे जितना पौधों को पानी की जरूरत होती है उतना पानी ही रुकता है और बाकी पानी निकल जाता है। हाइड्रोपोनिक तकनीक कम मेहनत में अधिक मुनाफा देता है क्योंकि खेतों में काम करने के लिए काफी मेहनत की जरूरत पड़ती है, लेकिन इस तकनीक में आपको ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती।

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हाइड्रोपोनिक तकनीक से किसानों को कम लागत में मिलता है अधिक मुनाफा

हाइड्रोपोनिक तकनीक से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा मिलता है। इसमे पौधों को ज्यादा आक्सीजन मिलता है। यही वजह है कि पौधे ज्यादा तेज गति से न्यूट्रीएंट को सोखते हैं। परंपरागत हरे चारे में प्रोटीन 10.7 फीसदी होती है जबकि हाइड्रोपोनिक्स विधि से उगाए गए हरे चारे में प्रोटीन 13.6 प्रतिशत होती है। यह किसानों के लिए कम मेहनत में अधिक मुनाफा देता है। यह तकनीक उन किसानो के लिए और लाभदायक है, जिनके पास चारे उगाने के लिए जमीन नहीं है। – By hydroponic method farmers are growing fodder without soil at low cost.

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