IIT से इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी छोड़ शुरू किए खेती, आज ऑर्गेनिक खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं

2019
organic farming

आज अधिकतर युवा इसलिए पढ़ते है कि, उन्हें अच्छी पैकेज वाली नौकरी मिल जाये और उनका भविष्य सुरक्षित हो जाए, पर आज भी कुछ युवा है जो अपनी अच्छी डिग्री के बाद भी अच्छी नौकरी को छोड़ कर खेती को चुनते है, आज ऐसे ही एक युवा की कहानी हम आपके साथ साझा करेंगे।

 

तथागत बारोड़ का परिचय-

 

तथागत मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले के कालापीपल तहसील के निवासी है। तथागत ने भोपाल के मौलाना आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.टेक( b.tech) की पढ़ायी के है, इसके साथ ही मुम्बई से IIT से मास्टर्स की पढ़ायी की है। तथागत की जगह और कोई युवा रहता तो अच्छी सी नौकरी कर के सेटल जो सकता था।

परन्तु तथागत कुछ अलग करना चाहते थे इसलिए उन्होंने, कृषि को चुना अपने करियर के रूप में, और अपने लगन औए कड़ी मेहनत से वो आज कृषि के छेत्र में भी सफल है।

 

कृषि को चुना करियर –

तथागत ने कृषि को चुन तो लिया अपना करियर, पर अब समस्या ये थी की तथागत कृषि के छेत्र में नए थे उन्हें इस बारे में अधिक जानकारी नही थी, इसलिए तथागत बहुत सारे अलग अलग गांव में गए और बहुत सारे किसानों से खेती की बारीकियां सीखी।

 

आर्गेनिक खेती की शुरुआत-

कृषि की बारीकियां सीखने के बाद तथागत ने आर्गेनिक( organic) खेती की शुरूआत की। सबसे पहले तथागत ने गेंहू की खेती की, तथागत अपने फसल में खाद खुद से बना के ही डालते थे। खाद बनाने के लिए तथागत जानवरो ले गोबर और मूत्र का इस्तेमाल करते थे, और इसी खाद को अपने खेतों में डालते थे, जिससे उनकी उपज में लागातार बढ़ावा होने लगा। तथागत के फसल को मांग बढ़ने लगी, तो तथागत ने अपनी खेती और उत्पादन दोनो को बढ़ाया।

 

17 किस्म की फसल उपजाते है-

 

तथागत गेंहू की जगह और भी चीज़े जैसे- मसाला, फल, सब्जी, अनाज उपजाते थे, ताकि उनके ग्राहकों को कही और नही जाना पड़े। तथागत ने अपना एक व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाया जिसका नाम उन्होंने ( my family farmer) रखा।

धीरे धीरे तथागत के फसलो की मांग बढ़ती गई, आज वो लगभग 18 एकड़ में 17 किस्म के फसलो की आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। तथागत को सालाना 9 लाख रुपये की आमदनी होती है खेती से, कृषि के साथ साथ तथागत कार्बनिक खाद भी बनाते है, इस काम मे वो तीन वर्षो से लगे हुए है। इसके साथ ही तथागत पशुपालन करते है और उनके दूध से बहुत सारे उत्पाद बना के बाजार में बेचते भी हैं।

 

Kheti trend तथागत बरोड़ को सरहाना करता है की उन्होंने बको युवओं से कुछ अलग करने की सोची और खेती को चुना और अपनी मेहनत से उसमे सफल भी हुए, हमारी तरफ से उन्हें ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।

अनामिका बिहार के एक छोटे से शहर छपरा से ताल्लुकात रखती हैं। अपनी पढाई के साथ साथ इनका समाजिक कार्यों में भी तुलनात्मक योगदान रहता है। नए लोगों से बात करना और उनके ज़िन्दगी के अनुभवों को साझा करना अनामिका को पसन्द है, जिसे यह कहानियों के माध्यम से अनेकों लोगों तक पहुंचाती हैं।

8 COMMENTS

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