पढ़ाने के साथ-साथ 3 वर्षों से बकरी पालन कर रहा है यह शिक्षक, खुद के फार्म से लाखों रुपये कमाते हैं

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Government teachers kashiram Yadav of haryana earns lakhs of rupees by goat farming

हमारा भारत कृषि क्षेत्र और पालन पशु में हमेशा से आगे रहा हैं लेकिन लोगो की सोच की बात की जाए तो लोग गांव के सारे रीति रिवाज छोड़ शहर में आकर अपनी जिंदगी जीने लगे हैं। क्युकी लोगो को लगता है की गांव की जिंदगी और खेती बाड़ी, पशु पालन सिर्फ वही लोग करते है जो अनपढ़ होते हैं जिस सोच को लेकर लोग शहर आकर अच्छी नौकरी में अपना पैर फसाने लगे हैं। और शहर के लोगो को देख गांव के लोग भी पशु पालन और खेती छोड़ने लगे। लेकिन वह इस बात से अनजान हैं की आज के समय में पशु पालन और खेती बाड़ी में काफी विकास हुआ है जिसके कही अनेक तरह के फायदे भी हैं क्युकी हर इंसान अपनी जिंदगी में ऐसी कमाई करना चाहता। जिसका उन्हे ज्यादा लॉस न हो। तो वर्तमान में खेती बाड़ी और पालन पशु में काफी विकास होने के कारण यह एक अच्छा कमाई का जरिया माना गया। जिसके चलते लोग शहर तो आकर रहने लगे, लेकिन वह फिर से गांव के तौर तरीके आजमाने लगे है क्युकी वर्तमान में युवा वे अन्य व्यक्ति का खेती बाड़ी और पालन पशु की तरफ रूझाव ज्यादा होने लगा हैं

आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी बताएंगे। की अपनी अच्छी खासी सरकारी नौकरी के साथ उन्होंने शुरू किया बकरी पालन, जिसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी में अपनी नौकरी के साथ एक नई शुरुवात कर एक अलग ही पहचान बनाई। आइए जानते हैं…….

**कौन है वह शिक्षक……

हम जिसके बात कर रहे है उनका नाम काशीराम यादव (Kashiram Yadav) है जो पेशे से एक सरकारी अध्यापक है। जो बच्चो को शिक्षा देने के साथ पशु पालन भी करते हैं। वह यह कार्य 3 साल से करते आ रहे हैं सरकारी नौकरी होने के बावजूद भी काशीराम यादव ने पशु पालन क्यों करना चाह। दरअसल काशीराम इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचाना बनाना चाहते थे क्युकी उन्हे लगता था की नौकरी तो आज है कल नही, जिसके चलते उन्होंने पशु पालन करने की सोची थी और आज वह इस क्षेत्र में काफी आगे बड़ चुके है की वह बकरी पालन के साथ कही अन्य पशुओं का भी पालन करते है शुरुवाती दिनों में उन्होंने पशु पालन बहुत कम मात्रा में किया था जिसकी शुरुवात उन्होंने 10 बकरी और 1 बारे से की थी लेकिन आज उनके फार्म में कही तरह के पशु है

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**काफी भारी मात्रा में फैला फार्म……

आज के समय की बात की जाए तो काशीराम यादव के फार्म में कही तरह के पशुओं का पालन किया जा रहा हैं जैसे की, बकरी, मुर्गा, बतख, खरगोश, मछलियां आदि। आपको इस फार्म में कही तरह की बकरियों और मुर्गियों की जातियां देखने को मिलेगी। जैसे की अफ्रीकन बकरी, बरबरी बकरी हर प्रजाति के अपने नुकसान और अपने फायदे हैं जिनको बेच कर पैसे कमाए जाते है बेचने के अन्य फार्म के लोगो को बाजार जाकर कही तरह की जानकारियां देनी होती हैं लेकिन काशीराम यादव का फार्म जो काफी चर्चा में आने के कारण, वहा पर लोग खुद आकर पशुओं को खरीदते है जिससे बाजार जा जा कर दौरा करने की आवश्यकता नहीं होती।

**पशुओं को दी हर तरह की सुविधा……

काशीराम यादव जिन्होने बड़े पैमाने पे पशु पालन का कारोबार तो शुरू किया। लेकिन जिसके साथ उन्हे काफी जानकारी भी ली की किस तरह बकरी वे अन्य पशुओं को हर तरह की सुविधा देनी चाहिए। आपको बता दे की काशीराम यादव ने अपना फार्म 1 एकड़ जमीन में फैलाया हुआ है जिससे हर तरह के पशुओं को किसी भी परिस्थिति का सामना न करना पड़े। उनका कहना है की उन्होंने सारे फ्लोर वुडन के बनवाए हुए है क्युकी गीला पन रहने के कारण बकरिया बीमार होने लगती थी जिस कारण उन्होंने फ्लोर को वुडन का काम करवाया। जिससे गीला पन आसानी से सुख जाए और पशुओं को किसी भी तरह का कोई नुकसान न होए।

**कही तरह के पशुओं का कर रहे है पालन…..

वर्तमान में पशु पालन काफी तेजी से बड़ने लगा हैं जिसमे आज हर व्यक्ति अपना भविष्य ढूंढने लगा हैं क्युकी महंगाई को बड़ता देख हर व्यक्ति कोई ऐसे काम चाहेगा । जिसमे मुनाफा ज्यादा और हानि काम। काशीराम यादव ने भी शुरूवाती दिनों में मुर्गी वे बकरी से अपने फार्म की शुरुवात की थी आज उनके फार्म में गाय, खरगोश, मछली आदि अन्य पशुओं का भी पालन किया जा रहा हैं। लेकिन अभी काशीराम यादव के फार्म में मछली का पालन काफी कम संख्या में किया जा रहा हैं क्युकी मछली को पालन करने के लिए काफी तरह के चीज का ध्यान रखना पड़ता है। जिसके चलते उन्होंने अभी सिर्फ एक टैंक का ही इस्तेमाल अपने फार्म में किया हुआ हैं।

आज के समय में लोग अपनी पुरानी प्रथा फिर से शुरू करने लगे है एक समय ऐसा आया था की लोगो को पशु पालन और खेती बाड़ी में कोई कमाई नहीं होती थी। जिसके बाद लोगो मे इनके फायदे को समझा और फिर से इसी प्रथा को चलाने लगे। लेकिन पशु पालन और खेती बाड़ी को शुरुवात करने से पहले हमे इनकी जानकारी अच्छे से ले लेनी चाहिए। क्युकी बिना जानकारी के इसकी शुरुवात काफी मुश्किलों भरी हो सकती हैं।

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