बहुत ही आसानी से छत पर ही उगा सकते हैं शुद्ध सब्जियां : तरीका देखें

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grow vegetables easily on terrace, Rooftops Gardening

हमलोगों ने देखा होगा कि पहले के समय में लगभग सभी घरों में खाने के लिए हरी सब्जियों का उत्पादन अपने ही खेतों में प्राकृतिक रूप से किया जाता था। धीरे-धीरे समय के साथ हीं साथ लोगों के आदतों में परिवर्तन होते गया और और लोग बेमौसम भी हरी सब्जियों को पसंद करने लगे, जिसके कारण उन्हें पूरी तरह से बाजार पर निर्भर होन पड़ा।

बिना मौसम के बाजार में मिलने वाली हरी सब्जियाँ तो केमिकल के सहारे उगाए जाते हैं, उन सब्जियों के खाने से हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए कुछ ऐसे भी लोग है, जो कि खुद को स्वस्थ रखने के किये अपने घर पर हीं प्राकृतिक तरीके से सब्जियों का उत्पादन करते हैं।

तो आइए जानते हैं कि कैसे घर पर गमले में सब्जियों का उत्पादन प्राकृतिक तरीके से किया जाता है :-

कैसे करे गमलों मे सब्जियों का उत्पादन ?

हम अपने घर के छतों के ऊपर गमलें में भी सब्जियों का उत्पादन कर सकते हैं। इसके लिए हमें गमले तथा घर में बेकार पड़े डब्बे या अन्य चीजों का उपयोग करना पड़ता है। सबसे खास बात यह है कि घर के छतों पर उगने वाले इस सब्जियों को दो तरीके से उगाया जा सकता है।

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तो आइए उन दोनो तरीकों पर चर्चा करे-

  1. हाइड्रोपोनिक तकनीक

यह तकनीक घरों या घर के छतों के ऊपर सब्जियों को उगाने में सबसे ज्यादा कारगर है। इस तकनिक में केवल पानी में या बालू अथवा कंकड़ों के बीच नियंत्रित जलवायु में बिना मिट्टी के पौधे उगाने की तकनीक को हाइड्रोपोनिक कहते हैं। हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से उगाई गइ सब्ज़ियाँ और पौधे अधिक पौष्टिक होते हैं।

सबसे खास बात यह है कि हाइड्रोपोनिक्स विधि से न केवल घरों एवं फ्लैटों में पौधे उगाए जा सकते हैं, बल्कि बाहर खेतों में भी फसलें उगाई जा सकती हैं। इस विधि से उगाई गई फसलें और पौधे आधे समय में ही तैयार हो जाते हैं।

जमीन में उगाए जाने वाले पौधों की अपेक्षा इस तकनीक में बहुत कम स्थान की आवश्यकता होती है। इस तकनीक में करीब 15 से 30 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है। इसमें 80 से 85 प्रतिशत आर्द्रता वाली जलवायु में इसकी खेती अच्छे तरीके से होती है।

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2 . जैविक (ऑर्गेनिक) खेती

अगर खेतों में रसायन प्रयोग न किया जाए तो इस खेती को हीं जैविक खेती कहते है। इस खेती में गोबर खाद, कम्पोस्ट, जीवाणु खाद, फसल का अवशेष, फसल चक्र और प्रकृति में मिलने वाले खनिज पदार्थों द्वारा पौधों को पोषक तत्वों दिए जाते हैं।

जैविक खेती में रोग व कीट प्रबंधन के लिए प्रकृति में मौजूद मित्र कीटों, जीवाणुओं, जैव एजेंट और जैविक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक से होने वाली खेती हमलोगों की वर्षों पुरानी परम्परा रही है।

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स्वास्थ के लिए है फायदेमंद

इन दोनो तकनिकों से उगने वाले सब्जियों का अगर नियमित रूप से सेवन किया जाए तो यह आम सब्जियों के तुलना में बहुत हीं लाभदायक होगा। हमे पता है कि बाजार में मिलने वाले सब्जियों में अनेकों रसायन तथा कीटनाशक का उपयोग किया जाता है, जिसके कारण वह किसी भी तरीके से हमारे लिए फायदेमन्द नहीं होता है। इसलिए हमे खास करके अपने द्वारा उगाए जाने वाले सब्जियों का हीं सेवन करना चाहिए।

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