कौन थी माफिया क्वीन गंगुबाई काठियावाड़ी, जानिए गंगुबाई काठियावाड़ी के बारें में यह बातें

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Know about real life Gangubai Kathiawadi

हम सभी लोग अपने जीवन में मुश्किलों से परेशान हो जाते है। हम सभी को सिर्फ अपनी ही परेशानी सबसे बड़ी नज़र आती है। लोगो की जिंदगियों में पता नही कितना कुछ हो जाता है। परंतु हम अगर दूसरो का दुख देखे तो असल में उन लोगो की मुश्किलों के आगे हमारी मुश्किल कुछ भी नही है। कई लोगो का जीवन तो इतनी कठिनाईयों से भरा होता है और फिर भी वह उस जीवन को जीते है। ऐसे कई लोगो की जिंदगी पर लोग किताबे भी लिखते है। फिल्मे भी बनाई जाती है। ताकि उनके जीवन से दूसरो को मुश्किलों में जीवन जीने की प्रेरणा मिल सके। उनकी मुश्किलों के आगे तो हमारे जीवन की मुश्किलें कुछ भी नही है।लोग अपनी जिंदगियों में जीने के लिए संघर्ष करते है। परंतु कुछ लोग मुश्किलों से भागने के लिए आत्महत्या का रास्ता भी अपनाते है। ऐसे में हम उन लोगो से प्रेरणा लेनी चाहिए। जिनकी जिंदगी में सब कुछ खत्म होने के बाद भी वह जीने के लिए लड़ रहे होते है। हाल ही में अभी बॉलीवुड ने गंगुबाई काठियावाड़ी पर एक फिल्म बनाई थी। जिसमे आलिया भट्ट ने गंगुबाई का किरदार बखूबी निभाया हैं। और जिसके माध्यम से लोग गंगुबाई की जिंदगी का संघर्ष देख पाए। उनकी जिंदगी में कितनी मुश्किल आई वह सब देख पाए।और उनसे हिम्मत न हारने की प्रेरणा भी ली। इन्ही के जीवन पर एक किताब भी लिखी गई है जिसका टाइटल है, “माफिया क्वीन ऑफ मुंबई” यह किताब हुसैन जैदी द्वारा लिखी गई थी। आज हम जानेंगे, गंगुबाई की कहानी कि कितना संघर्ष इन्होंने अपने जीवन में देखा और किस तरह अपनी जिंदगी जी।

*परिचय…….

गंगुबाई काठियावाड़ी का पूरा नाम गंगा हरजीवनदास काठीवाड़ी है। उनका जन्म 1939 में गुजरात में हुआ था। उनका जन्म एक अच्छे खासे परिवार में हुआ था। उनके पिता एक बैरिस्टर थे। बचपन से उनका पालन पोषण बहुत अच्छे से हुआ है। उनके परिवार वाले उन्हे अच्छे से पढ़ाना लिखाना चाहते थे। परंतु गंगुबाई को पढ़ने लिखने में कोई रुचि नहीं थी। बचपन से ही उनकी रुचि हीरोइन बनने में थी। वह एक हीरोइन बनना चाहती थी। जब गंगुबाई 16 साल की थी। तब उन्हे अपने पिता के अकाउंटेंट से प्यार हो गया था। जिनका नाम था रमंडीकलाल। दोनो एक दूसरे से प्यार कर बैठे थे। और यह बात गंगुबाई ने अपने घर पर भी सबको बताई थी। परंतु परिवार वालो ने इस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया। जिसके बाद गंगुबाई उस अकाउंटेंट के साथ घर छोड़कर निकल पड़ी। वह दोनो मुंबई चले गए और वहा दोनो ने एक दूसरे से शादी करली। यही से गंगुबाई का पूरा जीवन बदल गया था।

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*टूटा दिल…..

गंगुबाई अपने घर को छोड़कर रमंडीकलाल के साथ मुंबई आ गई थी। जहा उन्होंने एक दूसरे के साथ शादी भी करली थी। परंतु यही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट था। जब उन्हे उनके प्यार से सबसे बड़ा धोखा मिला। रमंडीकलाल ने गंगुबाई को कमाठीपुरा में बेच दिया था। गंगुबाई जिंदगी के उस मोड़ पर खड़ी थी जहा से वापिस जाने का उनके पास कोई रास्ता नही था। उन्होंने अपनी पीछे की सारी जिंदगी को भुला कर कमाठीपुरा की जिंदगी को अपना लिया था। उस समय वह पूरी तरह से टूट चुकी थी। क्योंकि वह अपने घर वालो को खुद छोड़कर आई थी। और जिसके साथ आई थी उन्होंने उसे इतना बड़ा धोखा दे दिया था। कमाठीपुरा में बिकने के बाद वह एक सेक्स वर्कर का काम करती थी। जो कि उनकी जिंदगी का सबसे मुश्किल समय था। उन्होंने यह सब अपने सपने में भी नही सोचा था कि कुछ ऐसा भी उनके साथ कभी हो सकता है। पर जिंदगी का कड़वा सच मान कर उन्होंने इसे अपनाया था।

*माफिया क्वीन ऑफ मुंबई……..

गंगुबाई जब सेक्स वर्कर के तौर पर काम करने लगी तो वह कुछ समय बाद कोठेवाली कहलाने लगी। वह वेश्यालय में किसी भी लड़की पर अपना हुकुम नही चलाती थी। यहां तक कि कोई अगर किसी लड़की को जबरदस्ती उनके कोठे पर बेच भी जाता था तो वह उस लड़की के घर वालो तक उसे पहुंचाने में मादा करती थीं। और जो भी उनके साथ रहा करती थी। उनका वह बहुत ध्यान रखती थीं। उनकी जिंदगी में इतना कुछ होने के बावजूद भी वह किसी पर जोर जबरदस्ती का अंजाम जानती थी। और इसी कारण वह हर किसी की मदद करती थी। जब गंगुबाई 28 साल की थी तब वह शीला के वेशाल्य में रहती थी। और एक पठान उनके बारे में पूछते हुए वहा तक पहुंचे थे। वह दिखने में बहुत लंबे और अजीब दिखते थे। वह आम लोगो की तरह नही थें। वैसे तो शीला उन्हे गंगुबाई तक कभी पहुंचने नही देना चाहती थीं। परंतु एक बार उस पठान ने शीला को डरा धमका कर गंगुबाई के पास जाने की जिद्द की। जिसके बाद शीला भी उन्हे रोक नही पाई।

*पठान का अत्याचार……..

जब पठान गंगुबाई से मिलते तो अक्सर वह उन्हे चोट पहुंचाते। और गालियां भी देते रहते थे। और उसके बाद उनके हक की कमाई भी उन्हे नही दिया करते थे। ऐसे करते करते गंगुबाई की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल में उनका कई दिनों तक इलाज चला और जब वह अस्पताल से लौटकर आई तो उन्होंने पठान का सारा चिट्ठा इक्कठा कर लिया था। जिसके बाद उन्हे यह पता चला कि वह एक डॉन जिसका नाम करीम लाला है उनके लिए काम करता है। गंगुबाई ने करीम लाला के आगे जाकर मदद मांगी। करीम लाला दिल के बहुत अच्छे थे। उन्होंने गंगुबाई को तुरंत अपनी बहन बना लिया और उनकी मदद भी की। करीम लाला ने पठान को बहुत पीटा और सबके आगे यह एलान किया कि गंगुबाई अब उनकी बहन है। अगर किसी ने भी उन्हे कोई परेशानी पहुंचाने की हिम्मत की तो वह उसे छोड़ेंगे नहीं।

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*वेशालय से निकाले जाने पर उठाई आवाज………

इन सबके बाद एक समय आया जब कमाठीपुरा में लड़कियों का विद्यालय चालू किया गया। परंतु वहा के लोगो ने यह उचित नहीं समझा कि एक ही जगह पर वेशाल्य और विद्यालय रहेंगे। उन्होंने वेशाल्य को बंद करने की मांग की। गंगुबाई विद्यालय खोलने के खिलाफ नही थी। परंतु इतने सालो से वेशाल्य में रह रही सभी औरतों के बारे में सोचकर उन्होंने वेशाल्य को बंद करना भी उचित नहीं समझा जिसके खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई। जिसके लिए वह बहुत मुश्किलों से पंडित जवाहरलाल नेहरू से भी मिली। उन्होंने इस मीटिंग को बहुत मुश्किलों से संभव कराया था। जब उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू से इसके बारे में बात की ओर अपने विचार प्रकट किए तो नेहरू जी ने भी उनके विचारों को देखते हुए उनसे कहा कि तुम इस काम में कैसे फस गई। तुम्हे बहुत अच्छा पति और नौकरी मिल जायेगी। गंगुबाई ने तुरंत अपनी बात साबित करने के लिए उन्हे कहा कि अगर आप मुझे अपनी पत्नी बनाना चाहे तो मै अभी यह काम छोड़ दूंगी। जिसके बाद नेहरू ने उन्हे इस प्रस्ताव का जवाब देते हुए मना कर दिया। गंगुबाई ने वही अपनी बात साबित कर दी थी और उन्हे कहा कि कहना बहुत आसान होता हैं पर उसे अपनाना उतना ही मुश्किल।

*आदर……

गंगुबाई ने जब नेहरू जी से बात की थी तब नेहरू ने उनसे वादा किया था कि वह उनके वेशालय को कमाठीपुरा से नही हटाएंगे। जिसके बाद किसी ने उनके वेश्यालय को हाथ तक नहीं लगाया था। गंगुबाई कहा करती थी कि उन जैसी औरतों को कभी किसी इंसान द्वारा इज्जत नहीं दी जाती। जब कि वह अपनी जिंदगी में कितना कुछ सहन करती है। वह आम औरतों को मर्दों की जलीलता से बचाती हैं। यह सब उन्होंने एक भरी सभा में कहा था। जिसके साथ उन्होंने यह भी कहा थी कि वेश्यो के लिए भी हर व्यवस्था होनी चाहिए। वह भी एक इंसान है। जो मर्दों की जरूरतों को पूरा करती है। अपनी जिंदगी में उन्होंने कई अच्छे काम किए जिसके कारण आज भी उन्हे आदर के साथ याद किया जाता हैं। भले ही उनकी मृत्यु हो गई है परंतु वेशाल्यो में उनकी मृत्यु के बाद उनकी फोटो लगाई गई थी। और लोग उन्हे हमेशा इज़्जत के साथ ही याद करते है।

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