सिर्फ छूने मात्र से ही दूर हो जाती है सारी थकावट, जानिए ‘पारिजात वृक्ष’ की खास बातें

5184
know all about parijaat tree

हिन्दू धर्म में इश्वर का पूजन और श्रृंगार विभिन्न प्रकार के मनमोहक और सुगंधित फूलों से किया जाता है। लेकिन पारिजात एक ऐसा वृक्ष है जिसका हिन्दू धर्म में एक विशेष मह्त्व है। इस वृक्ष के फूल से भगवान श्रीहरि का पूजन और श्रृंगार किया जाता है और यही वजह है कि इस सुगंधित पुष्प को ‘हरसिंगार’ के नाम से भी जाना जाता है।

पारिजात वृक्ष (Parijaat Tree) के बारे में लोगों की कई प्रकार की दिव्य मान्यताएँ भी हैं। कहा जाता है कि इस वृक्ष की छाया में बैठने और इसे छूने मात्र से ही सारी थकावट मिट जाती है।

 

know all about parijaat tree

इस वृक्ष को कई नामों से जाना जाता है

इस पेड़ को रात की रानी, शेफाली, हरसिंगार और शिउली आदि नामों से भी जाना जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि इस पेड़ का वनस्पतिक नाम ‘निक्टेंथिश आर्बोट्रिस्टिस’ (Nyctanthes Arbortristis) है। इसके अलावा इसे ‘नाइट जैस्मीन’ भी कहा जाता है। इस वृक्ष की ऊंचाई 10 से 25 फीट तक होती है। इसकी एक खास बात यह है कि इस वृक्ष पर बड़ी संख्या में फूल लगते हैं जिससे यह बेहद आकर्षण और मनमोहक दिखाई देते हैं।

 

know all about parijaat tree

हरसिंगार पुष्प सिर्फ रात को ही खिलते हैं

 

पारिजात के पुष्प की एक विशेषता यह है कि यह सिर्फ रात को ही खिलते हैं और सुबह होते ही सारे फूल झड़ जाते हैं। यही वजह है कि इसे रात की रानी कहा जाता है। इसके अलावा इस पेड़ पर से एक दिन में अत्यधिक फूल तोड़ने के बावजूद भी रात को फिर वापस से बड़ी संख्या में फूल खिल जाते हैं।

 

औषधीय गुणों से भरपूर है यह वृक्ष

यह वृक्ष औषधीय गुणों से भी भरपूर है। पारिजात वृक्ष (Parijaat Tree) के बीज का सेवन करने से बवासीर रोग से निजात मिल जाता है। इसके फूलों के रस को पीने से हृदय रोग से बचाव होता है। इसके अलावा इस पेड़ की पत्तियों को पीस कर शहद में मिलाकर खाने से सूखी खांसी ठीक हो जाती है तथा साथ ही इसके पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा संबंधी रोगों से भी छुटकारा मिलता हैं।

 

know all about parijaat tree

पौराणिक मान्यता

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सीता माता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटीं तो वे हरसिंगार के फूलों से ही अपना श्रृंगार किया करती थीं। वहीं हरिवंश पुराण में पारिजात वृक्ष को कल्पवृक्ष भी कहा गया है। इसके अलावा पारिजात वृक्ष के फूलों के बारे में यह मान्यता है कि स्वर्ग लोक में इसे सिर्फ उर्वशी नाम की अप्सरा ही छू सकती थी। इस वृक्ष के छूने मात्र से ही उर्वशी अप्सरा की सारी थकावट दूर हो जाती थी।

know all about parijaat tree

 

भारत में नहीं तोड़ सकते पारिजात के फूल

 

हिंदू धर्म में धन की देवी मां लक्ष्मी जी की पारिजात के पुष्प अतिप्रिय है। इस फूल को अर्पित करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है। पेड़ से टूटकर गिरे हुए हरसिंगार पुष्प को ही पूजा में इस्तेमाल किया जाता है। भारत में पूजा-पाठ के लिए इस पेड़ पर से फूलों को तोड़ना पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।

 

know all about parijaat tree

 

पारिजात वृक्ष (Parijaat Tree) की उत्पत्ति

यह मान्यता है कि इस वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी, जिसे भगवान इंद्र ने अपनी वाटिका में लगाया था। वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान माता कुंती ने हरसिंगार पुष्प से शिवजी की पूजा करने की इच्छा जताई थी। ऐसे में माता की इच्छा पूरी करने के लिए अर्जुन ने स्वर्ग लोक से इस वृक्ष को धरती पर स्थापित किया था। उसी समय से इस वृक्ष की पूजा की जाती है।

 

पृथ्वी पर सिर्फ पांच प्रजातियां ही मौजूद है

 

महाभारतकालीन एक पारिजात का वृक्ष उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित है। इसकी उंचाई 45 फीट है। इस वृक्ष का फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी है। विश्व में पारिजात वृक्ष की मात्र पांच प्रजातियां ही पाई जाती है।

12 COMMENTS

  1. 3.1k. OKUNMA. Mimar Sinan‘ın unutulmayan eserlerinde
    gizlenmiş olarak bulunan “BAYKUŞ FİGÜRLERİ”nden birkaçı ve baykuş figürlerinin hikayesini anlatacağız.
    Baykuşlar Yunan kültüründe bilgeliğin, eski Mısır’da
    ise uygarlığın temsilcisiydi. Dünya tarihindeki birçok kültür ve uygarlıkta
    farklı anlamları olan.

  2. Answer. Aspirin and Benadryl have no known drug interactions.
    They are considered to be safe to take together.
    It is important to note however, that if you take aspirin for cardio-protection (e.g.
    low dose aspirin daily), Benadryl has been associated with adverse cardiac effects, such as: Tachycardia (fast heart
    rate).

  3. Hello there, just became aware of your blog through Google, and found that it is really informative. I am going to watch out for brussels. I’ll be grateful if you continue this in future. Numerous people will be benefited from your writing. Cheers!

  4. I was wondering if you ever thought of changing the structure of your site? Its very well written; I love what youve got to say. But maybe you could a little more in the way of content so people could connect with it better. Youve got an awful lot of text for only having one or 2 images. Maybe you could space it out better?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here