मां-बेटे ने एक साथ पाई PCS की परीक्षा में सफलता: Success Story

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Mother and son from kerala qualifed PCS exam together

एक माता पिता अपनी जिंदगी में हमेशा अपने बच्चो को तरक्की की राह पर देखना चाहते है। हर माता पिता का यह सपना होता है कि जो शौंक वह पूरे नही कर पाए वो सब उनके बच्चे जरूर पूरे करें। हर मां बाप अपने बच्चो का सपना पूरा करने के लिए हर नामुमकिन कोशिश करते है। उनके बच्चो का सपना ही उनकी जिंदगी की भी मंजिल बन जाती है। परंतु अगर यही बच्चे मां बाप के लिए करे तो वह कितने खुशनसीब साबित होंगे। जब बच्चे अपने मां बाप का सपना पूरा करवाए। उन्हे हौसला दे और आगे बढ़ने की हिम्मत दे तो माता पिता को और जायदा गर्व महसूस होगा। माता पिता तो हमेशा अपने बच्चो के बारे में सोचते है। पर जब वही बच्चे अपने माता पिता के बारे में सोचे और उन्हे अपनी जिंदगी के हर कदम पर साथ रखे तो माता पिता बहुत खुश होते है। और वह यह सोचते है कि उनका जीवन सफल रहा। और इन सबके बाद कुछ लोग ऐसे भी है जिनकी सोच इन सबके लिए अच्छी नहीं हैं। बहुत पहले के समय में लोग विवाह के बाद स्कूल या कॉलेज पढ़ने के लिए जाना सही नही समझते थे। उन्हे ऐसा करने में बहुत शर्म महसूस होती थीं। परंतु वह यह नही जान पाते थे कि वह कितना अच्छा मोका गवा रहे है। हमे अपने हर सपने अपने हर लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर नामुकिन कोशिश करनी चाहिएं। आज हम बात करेंगे एक ऐसी मां और बेटे की जोड़ी के बारे में जिन्होंने एक साथ पीसीएस की परीक्षा पास की। आइए जानते हैं, इनकी कहानी…….

**परिचय…….

आज हम जिनके बारे में बात करने जा रहे हैं, उनका नाम है बिंदु (Bindu) यह 42 वर्ष की हैं और इनका बेटा 24 वर्षीय है। यह केरला के रहने वाले हैं। इन दोनो मां बेटा ने केरल लोक सेवा की पीएससी परीक्षा को पास कर सरकारी नौकरी हासिल कर दिखाई है। आप लोग यह सब जानकर हैरान होंगे की एक मां और बेटा एक साथ कैसे पढ़े और परीक्षा पास की। तो इसकी भी एक कहानी हैं। दरअसल यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब बिंदु के बेटे 10वी कक्षा में पढ़ते थे। वह पढ़ी लिखी थी। और अपने बेटे को भी पढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करती रहती थी। एक दिन उनमें खुद में भी यह प्रेरणा जागी और उन्होंने सोचा कि क्यू न पीसीएस की परीक्षा की तयारी की जाए। तभी उन्होंने पढ़ने की शुरुवात की ताकि वह अपनी जिंदगी में कुछ कर सके और अपनी एक अलग पहचान बनाए।

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**किया कई बार प्रयास…….

बिंदु ने बताया कि ऐसा नहीं है कि पहली बार में ही उन्होंने सारी परीक्षाएं पास करली। उन्हे भी इन्हे पास करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। और एक बार नही दो बार नही तीन बार उन्हे निराशा ही हाथ लगी। उन्हे पढ़ाई का बहुत अनुभव था क्योंकि वह कई सालो से एक आंगडवाडी में बच्चो को पढ़ाया करती थी। तो इसी की बदौलत उनके पास कई सालो से पढाने का अनुभव था। उन्होंने चौथी बार में परीक्षा को पास किया और सफल हुई। सही ही कहते है, मेहनत करने वालो की कभी हार नही होती। इतनी आयु होने के बाद और तीन बार निराशा हाथ लगने के बाद भी बिंदु ने अपना हौसला नहीं टूटने दिया। लगातार मेहनत करती रही और चौथी बार परीक्षा में पास होकर सरकारी नौकरी हासिल की जो की उनके और उनके बेटे के लिए बहुत खुशी का पल था। खुशी के साथ साथ कामयाबी भी थी। जिसे सुनकर और देखकर उनके सभी करीबी लोग बहुत प्रसन्न हुए थे और उन दोनो पर गर्व महसूस कर रहे थे।

Mother and son from kerala qualifed PCS exam together

**रैंक…..

बिंदु और उनके बेटे ने एक ही साथ पीएससी की परीक्षा को पास किया था। जिसमे से बिंदु का यह चौथी बार था। और जब उन दोनो ने परीक्षा को पास किया तो बिंदु ने 92वी रैंक और उनके बेटे ने 38वी रैंक प्राप्त की जो कि कोई छोटी बात नही है। परीक्षा का परिणाम आने पर उन दोनो की खुशी का ठिकाना न था। यह उन दोनो के लिए ही एक दूसरे पर गर्व करने का समय था। जहा माता बिंदु को अपने बेटे पर गर्व महसूस हो रहा था। वही उनके बेटे को भी उन पर बहुत गर्व महसूस हो रहा था। और दोनो एक ही फील्ड में एक साथ सरकारी नौकरी करने वाले थे। जो कि अपने आप में ही बहुत बड़ी कामयाबी हैं। इससे बाकी अन्य लोगो को भी प्रेरणा मिलती है। जो लोग उम्र जायदा होने के कारण दुबारा पढ़ने में शर्म महसूस करते है। वह बिंदु के उदहारण से प्रेरणा ले सकते है।

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**कई लोगो ने को मदद……..

बिंदु के आस पास के लोग भी खुले विचारों के थे। किसी ने भी उन्हे इस बात का कभी एहसास नहीं दिलाया कि वह बहुत जायदा उम्र की हैं जहा उनके बेटे की उम्र यह परीक्षा पास करने की है। वह वहा कैसे परीक्षा देंगी। उन्होंने हमेशा बिंदु का साथ दिया और उन्हे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यही ही नही उन्होंने बिंदु की बहुत मदद भी की। बिंदु बताती है कि पहले जब बिंदु ने इसके बारे में सोचा था तो उन्होंने इसकी कोचिंग ज्वाइन की थी। जहा पर उनके शिक्षक उनकी काफी मदद किया करते थे। और उनमें और बाकी बच्चो में कोई फरक नही रखते थे। बाद में जब बेटे का विचार बना तो उन्होंने भी कोचिंग लेना शुरू किया। वह यह भी बताते है कि भले ही उनकी मंजिल एक थी। परंतु वह कभी भी एक दूसरे के साथ बैठकर नही पढ़ा करते थें। दोनो का जब जब मन करता था तब तब वह अकेले बैठकर पढ़ाई किया करते थें।।और जरूरत पड़ने पर कुछ चीजों पर बात भी किया करते थे।

**प्रेरणा…….

आज के समय में लोग विवाह करने के बाद भी पढ़ना पसंद करते हैं। पहले के जमाने में लड़का और या लड़की विवाह करने के बाद हर किसी को पढ़ने में, स्कूल या कॉलेज जाने में शर्म महसूस होती थीं। जिसके कारण कई लोग अपने सपनो को दबाकर बैठ जाते थे। आज भी कुछ लोग ऐसा ही करते हैं। बिंदु उन सब लोगो के लिए एक प्रेरणा है। हमे अपने लक्ष्य को कभी नही दबाना चाहिए। उनकी ओर हमेशा आगे बढ़ता रहना चाहिएं। अगर हमारे साथ हमे प्रोत्साहित करने के लिए कोई भी नही हैं तो हमे खुद पर भरोसा रख कर हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। चाहे फिर दुनिया हमारे बारे में कुछ भी कहती रहे। हमे खुद को फरक नही पड़ने देना चाहिए और अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए।

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