नदी का पानी न हो प्रदूषित इसके लिए दिनभर खड़ा रहकर करते हैं रखवाली, लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहें : चंद्रकिशोर पाटिल

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Nashik's Chandrakishore patil whole day stands godavari river to prevent people from dumping waste

आज के समय में प्रदूषण विश्व की सबसे गंभीर समस्या बनी हुई है। हम जानते हैं कि, दिन प्रतिदिन बढ़ती प्रदूषण के कारण जीव-जंतुओं और मनुष्य को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस गंभीर समस्या से निपटारे के लिए नासिक (Nashik) के इंदिरानगर के रहने वाले चंद्र किशोर पाटिल (Chandra Kishore Patil) ने एक मुहिम छेड़ी है।

पानी में कचरा डालने से लोगों को करते हैं मना

चंद्र किशोर पाटिल (Chandra Kishore Patil) ने प्रदूषण को रोकने के लिए एक पहल की है। वे सड़क पर खड़े होकर लोगों को पानी में कचरा डालने से मना करते हैं।

आईएफएस अधिकारी श्वेता बोद्दु ने ट्विटर कर की तारीफ

बता दें कि, आईएफएस अधिकारी श्वेता बोद्दु ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर चंद्र किशोर की कहानी को शेयर किया है। उन्होंने इस पोस्ट में किशोर की खूब तारीफ की है तथा उन्हे रियल हीरो भी कहा है। अब यह पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब तेजी से वायरल भी हो रहा है।

श्वेता ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट कर कैप्शन में लिखा कि, “मैंने इस व्यक्ति को पूरे दिन सड़क मे हाथ में सीटी लेकर खड़े देखा। वह लोगों को नासिक की गोदावरी नदी में प्लास्टिक की थैलियों को फेंकने से रोक रहे थे।”

वहीं चंद्र किशोर पाटिल का कहना है कि, वे सड़क पर खड़े होकर नदी की निगरानी करते हैं ताकि कोई इसके पानी में कचरा न फेक दें। उन्होंने बताया कि, हर साल त्योहारों के बाद नदी का पानी गंदा हो जाता है क्योंकि लोग इसमें कचरा फेक देते हैं।

पांच साल पहले शुरू की मुहिम

पाटिल ने बताया कि, उन्होंने पांच साल पहले हीं प्रदूषण को रोकने का स्टैंड लेने का फ़ैसला किया और लोगों को जल निकायों को प्रदूषित करने से रोका। जब कोई नदी में कचरा फेकने आता है तो वो लोगों से कचरा को बाहर रखवा देते हैं और फिर नगर निगम कचरा ले जाता है।

उन्होंने बताया कि, “वे पांच साल से लगातार प्रदूषण को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि, वे इस काम को तब तक करेंगे जब तक उनका स्वास्थ्य ठीक है।”

बता दें कि, पाटिल (Chandra Kishore Patil) सुबह से लेकर रात 11 बजे तक नदी के किनारे एक सीटी के साथ खड़े रहते हैं और लोगों को नदी में कचरा नहीं फेंकने के लिए सचेत करते हैं। इसके अलावा वे नदी के पानी से बोतलें भरते हैं और लोगों से इसे लेने के लिए कहते हैं लेकिन जब वे मना करते हैं तो वे उन्हे गंभीर प्रदूषण के बारे में जागरूक करते हैं।

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