शिक्षक की नौकरी छोड़ शख्स ने शुरु किया चावल की भूसी का बिजनेस, अब कर रहे हैं लाखों की कमाई

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Odisha Teacher Bibhu Sahu Earning Lakh rupees by Rice Husk Business

जैसा कि हम सब जानते है कि आज के दौर में लोग पढ़ाई के मामले में बहुत आगे पहुंच गए है। आज के समय में कंपटीशन बहुत बढ़ गया है। लोगों को बहुत प्रयास करने के बाद भी नौकरियां नही मिल पाती। हालाकि सरकार द्वारा हर साल कई नौकरियां उपलब्ध कराई जाती है। परंतु हमारे देश की आबादी भी बहुत जायदा है। और कंपटीशन का लेवल भी बढ़ गया है। जिसके कारण बहुत लोग पीछे रह जाते है। परंतु कुछ लोग ऐसे भी होते है जिन्हे नौकरी मिल जाती है। परंतु किसी कारण वश वह नौकरी नहीं करना चाहते। ऐसे में लोग अपने स्टार्टअप के बारे में सोचते है। क्योंकि लोगो को लगता है कि जितना वह नौकरी करके कमा रहे है। उतने में वह अपने कारोबार से भी कमा सकते है। क्योंकि आज के दौर में महंगाई भी बहुत हद्द तक बढ़ गई है। हर चीज पर तरह तरह के टैक्स लग रहे है।जिससे लोगो की नौकरी से उनका घर नही चलता है। तो वह अच्छी खासी नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू करने की सोचते हैं। आज हम बात करेंगे एक ऐसे शख्स की जिसने शिक्षक की नौकरी छोड़कर चावल की मील का कारोबार शुरू किया।

**कौन है वह शख्स……

आज हम जिनके बारे में बात करने जा रहे हैं, उनका नाम है बिभु साहू। यह ओडिशा के रहने वाले है। यह लगभग 50 वर्ष के है। कई सालो से यह एक शिक्षक की नौकरी कर रहे थे। परंतु शिक्षक की नौकरी करते समय इन्हे खुद का कारोबार शुरू करने का विचार आया। तभी इन्होंने साल 2017 में अपनी शिक्षक की नौकरी को छोड़कर चावल के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। कई साल चावल के क्षेत्र में काम करने के बाद इन्होंने चावल की मील शुरू करने का विचार बनाया। जिसके बाद इन्होंने लगभग 7 साल बाद यानी की साल 2014 में एक चावल की मील शुरू की। चावल की मील शुरू करने के बाद उन्हे चावल बनते समय बहुत भूसी (जो कि एक वेस्ट मैटेरियल होता है) निकलता नजर आया। उन्होंने उस भूसी के बारे में सोचा क्योंकि वह हमारे पर्यावरण के लिए बिलकुल भी सही नही होता। कई लोग उसे जला देते है जो हमारे पर्यावरण को बहुत दूषित करता है।

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**क्या करते थे भूसी का………

बिभु भूसी को न तो अपनी मील में रख सकते थे। और न ही उसे जलाना चाहते थे क्योंकि उसे जलाना यानी की पर्यावरण को प्रदूषित करना जो कि उन्हे बिलकुल सही नही लगता था। इसलिए उन्होंने भूसी का एक रास्ता निकाला। जिससे उसका इस्तेमाल हो सके। बिभु ने अपनी मील के भूसी को एक स्टील की कंपनी को बेचना शुरू कर दिया। स्टील की कंपनी उस भूसी का इस्तेमाल कर सकती थी। इसलिए बिभु ने भूसी को बेचना ही सही समझा। इससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा, और भूसी को स्टोर करके भी नही रखना पड़ेगा। स्टील कंपनी में इसका अच्छे से इस्तेमाल कर लिया जाता है। चावल मील चलाने वाले लोग इसके बारे में इतना नही सोचते। या तो इसे जला देते है या फिर इसे स्टोर करके रखते है। जब कि दोनो ही तरीके सही नही है।

**कमाई…..

बिभु बताते है कि वह अपनी मील में बची भूसी को स्टील कंपनी को बेच देते है। जिससे उन्हे बहुत मुनाफा होता है। और स्टील कंपनी को भी फायदा होता हैं। यही ही नही बिभु अपनी मील की भूसी को बाहर विदेशों की कंपनियों भी बेचते है। भूसी को बेचने से ही उन्हे बहुत जायदा मुनाफा होने लगा है। वह खुद कहते है कि चावल से जायदा मुनाफा उन्हे भूसी बेचने में होने लगा है। यह भूसी का एक सही इस्तेमाल भी है। जिससे सभी को फायदा हो रहा है। और पर्यावरण भी सुरक्षित रह रहा है। आज बिभु की भूसी का व्यापार चावल के व्यापार से जायदा प्रसिद्ध और फायदेमंद साबित हो रहा है। बिभु की कमाई सालाना लगभग 20 लाख रुपए हो जाती है। जो कि कोई छोटी रकम नहीं है। आज उन्हे अपने कारोबार में बहुत फायदा हो रहा है।

**प्रेरणा……

अक्सर लोग अपने व्यापार में इतने व्यस्त हो जाते है कि उन्हे बाकी चीजे नही दिखती। उन्हे बस कमाई से मतलब होता है।जैसा कि अभी हमने पड़ा की चावल की मील में भूसी जो कि वेस्ट होता है वह बच जाता है। जिसे लोग स्टोर करके रख लेते है या फिर जला देते है। उसे जलाने वाले व्यापारी कभी यह नहीं सोचते कि उसे जलाने से पर्यावरण को कितनी हानि पहुंच रही है। ऐसे में बिभु जैसे लोगो से बाकी व्यापारियों को प्रेरित होना चाहिए। बिभु ने एक रास्ता निकाला जिससे सबको फायदा हो। वह उस वेस्ट मैटेरियल भूसी को बेचते है। बल्कि भारत में ही नही भारत से बाहर भी कई कंपनियों को वह भूसी बेचते है और लाखो रुपए की कमाई कर रहे है। यह एक अच्छे व्यापारी की ही निशानी है। कि वह अपने व्यापार के साथ साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखते आए है।

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