शहर में रहने के बावज़ूद पर उंगाती हैं तरह तरह की सब्जियां, अपने छत पर लगाती हैं 20 तरह की सब्जियां

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हम ये तो नही कह सकते कि गार्डनिंग का शौक हर इंसान को होता है , या प्रत्येक व्यक्ति का झुकाव पेड़- पौधों के प्रति होता ही है। लेकिन हां, बहुत बार हम दूसरों से प्रेरणा ले कर भी कुछ नई शुरुआत कर देते हैं।
ठीक उसी प्रकार आज हम एक ऐसे ही महिला के बारे में जानेंगे, जो अपने आस पड़ोस में जैविक सब्ज़ियों को देखकर , खुद के सेहत को संवारने का ज़िम्मा उठाया। उनका नाम है – रुचिका

रुचिका का परिचय

रुचिका हरियाणा के गुरुग्राम की निवासी हैं। शहर में रहते हुए उन्होंने देखा कि लोग प्रदूषित चीज़ों से बचने के लिए अपने घरों में ही ओर्गानिक सब्ज़िया उगा रहे हैं। फिर क्या, रुचिका ने भी शुरू कर दिया किचन गार्डन।
कहाँ उगाती हैं सब्ज़ियां-
करीबन 7-8 वर्ष हो गए इन्हें गार्डनिंग करते हुए। अपने घर के सभी खाली जगहों पर, जैसे:- छत, बालकनी, आंगन जैसी जगहो पर ग्रो बैग द्वारा उगाती हैं सब्ज़िया। पहले उन्हें इस काम मे ज्यादा रुचि नही थी, उन्हें घर हमेशा साफ चाहिए था। इन्हें लगता था कि गार्डनिंग करने से घर मे मिट्टी, पानी आदि फैलेगा। पढ़ाई करते वक़्त चूकि उनका विषय बॉटनी था, तो उन्हें प्रैक्टिकल में आलो को उपजाने का कार्य दिया गया।

किचन गार्डन से होने लगे फायदे

बस यही से शुरू हुई नई कहानी और वो आज अपनी सारी जरूरत वाली चीज़ों को खुद ही जगाती हैं। जब रुचिका गुरुग्राम के डीएलएफ सोसाइटी में रहने लगी तो उन्होंने देखा कि लोग बहुत एक्टिव थे वहाँ, गार्डनिंग को ले कर। लोग पालक, मिर्च, धनिया आदि की उपज करते थे, तब रुचिका ने सोचा कि उन्हें भी कुछ करना चाहिए।
उन्होंने धीरे धीरे सब्ज़ियो में हाथ आजमाया।उन्होंने फूलगोभी उगाया, जो इतना हुआ कि लोगो मे बाटना पड़ा। उनका मानना है कि प्रकृति आपको लालच देती है, आप जितना जुड़ेंगे उतना संतुष्टि मिलेगी। रुचिका कहती हैं कि इस काम से जितना सुकून मिलता है उतना कही नही मिल सकता। रुचिका इस काम मे आगे बढ़ते गयी, और कभी पीछे मुड़कर देखना नही चाहा।

वेस्ट मटेरिअल का भी करती हैं प्रयोग:-

रुचिका मुख्यतः reusing, कम्पोस्टिंग और रीसाइक्लिंग पर ज्यादा काम करती हैं। घर के किचन से निकले कचरे का इस्तेमाल खाद बनाने में करती हैं।

  वो अपने गार्डन में मौसमी सब्ज़िया उगाती हैं। अभी वो सर्दियों में होने वाले सब्ज़ियो पर काम कर रही हैं। धनिया, पत्तागोभी, चुकुन्दर, पुदीना, तुलसी, बींस, सरसो आदि के उनके पास आपको 16 से 18 किस्म देखने को मिलेंगे। रुचिका सारे पौधों का ख्याल खुद ही रखती हैं।

इस पूरे प्रक्रिया में उन्होंने कभी केमिकल्स का सहारा नही लिया है। करीब 100 लीटर बायोएनज़ाइम वो घर के कचरे से ही तैयार कर लेती हैं। यहां तक कि प्याज और नीम से स्प्रे भी तैयार करती हैं। लोगो को आश्चर्य होता है कि गमलो में इतना कैसे उगा लेती हैं, तो रुचिका बताती हैं कि जैविक खाद का जादू है। पौधों को जब भरपूर पोषण मिलेगा तो भला क्यों नही वो खिलेंगे और उत्पादन अच्छा होगा। इसलिए जरूरी है कि आप उनका सही ध्यान रखे।

मिल्चिंग औऱ मल्टी क्रॉपिंग भी दिखाते हैं कमाल-

रुचिका का मानना है कि इस प्रक्रिया या तकनीक से आपको लाभ मिल सकता है। इसके लिए आप ग्रो बैग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।  जब आप इसमें सूखे पत्ते और घास आदि को संरक्षित करते हैं तो ये धीरे धीरे गलता है और नमी बरकरार रहती है। इससे पानी का भी इस्तेमाल कम होता है।

एक गमले में लगा सकते हैं कई पौधे


रुचिका कहती है ही जरूरी नही की एक गमले में एक ही पौधे लगाये जाए, बल्कि आप सही चुनाव कर के दो चार एक साथ लगा सकते हैं। जैसे वो बेल, तुलसी, हर्ब्स आदि को एक साथ लगाती हैं। आप जितना नया करेंगे उतना अनुभव भी होगा और प्रकृति आपको कभी निराश नही करेगी।

सब्जियो के साथ बीज भी मिलेगा:-

  गार्डनिंग में सब्जियां तो होंगी ही साथ ही साथ आप बीजो को भी अगले साल के लिए संरक्षित कर सकते हैं। जैसे, तोरई को आप तोड़ने जाते है तो कुछ को ऐसे ही बेल पर छोड़ दे तो आपको लूफा प्राप्त हो जाएगा। 

तो हमे कभी कभी दुसरो के अच्छे कामों से सीख ले कर उसे अपने जीवन मे भी शामिल करना चाहिए। और बात यदि गार्डनिंग की हो , प्रकृति के करीब जाने की हो , तो इससे अच्छा मौका कहा मिलेगा। पेड़ लगाए, जीवन बचाएं।

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