आर्थिक तंगी के कारण कभी मजदूरी की तो कभी रिक्शा चलाया, आज गोंड पेंटिंग से विश्व भर में बनाई पहचान

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Story of Gond Artist Venkat Raman Singh Shyam

हमारे देश में कलाकारों की कमी नहीं है। हर किसी के अंदर कोई न कोई कलाकार जरूर छिपा होता है। बस जरूरत उस कलाकार को ढूंढने और सही दिशा देने की होती है। कई लोगो में छिपा कलाकार उनके बचपन में ही बाहर आ जाता है। और बड़े होकर भी उसी कला को सुधारना और सही दिशा दिखाना लोगो को अलग पहचान बनाने में मदद करता है। आज कल लोग अपनी कला और हुनर की वजह से पता नही कहा से कहा पहुंच गए है। अगर समाज में उनकी कला को महत्व न भी दिया जाए तो आज कल सोशल मीडिया के दौर में लोग अपने हुनर और कलाकारी को सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म पर अपलोड करते है। उस प्लेटफार्म के जरिए एक कलाकार प्रसिद्ध भी हो सकता है। सोशल मीडिया ने कई लोगो की जिंदगी बदली है। इसके अलावा कई लोग इसपर भरोसा न करके आगे बढ़ना पसंद करते है। क्योंकि सोशल मीडिया पर भी प्रसिद्ध होना हर किसी की किस्मत की बात नही होती है। बहुत बार लंबा समय भी लग जाता है। इसलिए कई लोग अपनी कला के गुरुओं के पास जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करते है। ताकि उनकी कला को बढ़ावा दिया जाए। और वह अपनी जिंदगी में अपना नाम बना पाए। आज हम बात करने जा रहे हैं, एक ऐसे ही व्यक्ति की जिन्होंने अपने अंदर की कला को बचपन में ही तलाश लिया था। और सही राह मिलने पर उन्होंने अपनी कला की मदद से अपनी एक अलग पहचान बनाई।

**कौन है वह कलाकार…….

आज हम जिनकी कहानी जानने वाले हैं, उनका नाम है वेंकट रमन सिंह श्याम। इन्हे बचपन से ही दीवारों पर चित्रकारी करने का बहुत शौंक था। यह अपने घरों की दीवारों और अन्य जगहों पर चित्रकारी किया करते थे। जब भी, जहा भी इन्हे मोका मिलता वह चित्रकारी किया करते थे। ईनके चाचा जिनका नाम जनगड सिंह है जो कि एक आर्टिस्ट है। यह एक दिन इनके घर आए तो इन्होंने देखा की उनके भतीजे ने घर की दीवारों पर बहुत सुंदर सुंदर और कई तरह के चित्रकार बनाए हुए थे। जिनमे से कई चित्रकार पशुओं, गांव के दृश्य के थे और एक चित्रकार तो भगवान साई का बना था। जो कि उन्हे बहुत अच्छे लगे। और वह सब देखकर उन्होंने वेंकट रमण सिंह के करियर के बारे में बहुत अच्छा सुझाव भी सोचा।

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**चाचा ने दिखाई सही राह…….

वेंकट रमन सिंह के चाचा ने उनकी चित्रकारी देख कर यह जान लिया था कि अगर उन्हें सही सिख दी जाए तो वह एक कलाकार से कम नहीं है। और आगे जाकर अपने देश का नाम रोशन भी कर सकते है। जिसके लिए उन्होंने रमन सिंह को सही राह भी दिखाई। उन्होंने उनसे कहा कि वह अपनी शिक्षा पूरी करके उनके पास भोपाल आए। और वेंकट रमन सिंह ने भी कुछ ऐसा ही किया, वह अपनी शिक्षा पूरी होने के बाद अपने चाचा के पास भोपाल रहने चले गए। जहा उनकी मुलाकात बहुत सारे आर्टिस्ट से हुई। रमन सिंह को बचपन से ही चित्रकारी का शौंक था। उनके मामा भी चित्रकारी किया करते थे। बचपन में वह अपने मामा को देखकर ही चित्रकारी सीखे परंतु उन्होंने चित्रकारी की बहुत जायदा जानकारी नहीं ली थीं। बस उनका जब भी मन करता या उन्हे अपने गांव का कोई दृश्य अच्छा लगता तो वह चित्रकारी करने बैठ जाते।

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**किए संघर्ष……..

तरक्की का पहला पहलू ही संघर्ष है। कोई भी व्यक्ति बिना संघर्षों के नही चमकता। वेंकट रमन सिंह श्याम ने भी कई संघर्ष किए। अपने चाचा के पास भोपाल कुछ साल रहने के बाद और कला को करीब से पहचानने के बाद वह दिल्ली अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए निकल पड़े। दिल्ली जाकर उन्हे बहुत संघर्ष करना पड़ा। वहा पर उन्हे भोपाल की तरह रहन सहन नही मिला था। दिल्ली में उन्हे अपनी रोजी रोटी खुद कमानी थी।जिसके लिए उन्हे बहुत कुछ करना पड़ा था। अपनी रोटी कमाने के लिए उन्होंने मजदूरी भी की और लोगो के घरों में सफेदी भी की। उन्होंने अपनी जिंदगी में उस समय पर बहुत संघर्ष किया। क्योंकि वहा पर उनके साथ उनका कोई अपना मौजूद नही था। हर चीज का उन्हे खुद इंतजाम करना पड़ता था।

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**लौट आए दिल्ली…….

दिल्ली में वह पोस्टर्स और बोर्ड पेंटिंग का काम कर रहे थे। कि तभी उन्हे एक बीमारी हो गई। जिसके कारण वह काम नही कर पा रहे थे। और काम के बिना वह अपनी रोजी रोटी केसे कमाते तो उन्होंने भोपाल वापिस लौटने का फैसला किया। और दिल्ली से भोपाल वापिस लौट आएं। दिल्ली में उन्हे बीमारी साल 1993 में हुई थी जिसके बाद वह भोपाल लौट आए थे। और कुछ सालो तक उन्होंने भोपाल में ही पेंटिंग का काम।किया। साल 2001 में उन्हे सुबह सुबह पता चलता है कि उनके चाचा जनगड़ सिंह जो कि एक गोंड आर्टिस्ट थे उन्होंने जापान में आत्महत्या करली है। यह सुनकर वेंकट रमन सिंह श्याम हैरान रह गए। और उनकी मौत ने रमन सिंह को तोड़ दिया था। क्योंकि उन्ही से उन्होंने पेंटिंग की शिक्षा प्राप्त की थी और वही थे जिन्होंने रमन सिंह को सही राह दिखाई थी।

**चले चाचा की राह पर……

चाचा की मृत्यु होने के बाद रमन सिंह ने अपने चाचा का काम संभालने का फैसला किया। हालाकि उन्हे गोंड पेंटिंग उतने अच्छे से तो नहीं आती थी। परंतु उन्होंने यह ठान लिया था कि वह अपने चाचा के काम को ही आगे बढ़ाएंगे और उन्ही की सिखाई हुई राह पर चलेंगे। उन्होंने अपने सारे काम छोड़ कर गोंड पेंटिंग करने की शुरुवात करी हालाकि उनकी की हुई गोंड पेंटिंग को इतना महत्व नहीं दिया जाता था। परंतु फिर भी वह हार मानने को त्यार नही थे। और आगे बढ़ना चाहते थे। कोई भी उनकी पेंटिंग को पसंद नही करता था। वह विदेश जाकर वहा के म्यूजियम में पेंटिंग्स को करीब से देखा करते और खोज करते कि किस तरह की पेंटिंग यहां के लोगो को पसंद आ सकती है। उन्होंने इस खोज के बाद गोंड पेंटिंग बनाना दुबारा शुरू किया।
आज उनकी गोंड पेंटिंग इतनी मेशहुर है कि भारत के कई प्रसिद्ध म्यूजियम में इनकी पेंटिंग लगाई जाती हैं और सिर्फ भारत में ही नही बल्कि विदेशों में भी इनकी पेंटिंग कई मेशहूर जगहों पर लगाई जाती है। वेंकट रमन सिंह श्याम अपनी पेंटिंग के लिए मध्य प्रदेश की सरकार द्वारा सम्मानित भी हुए है। आज उन्होंने देश विदेश में अपनी अलग पहचान बना ली है।

2 COMMENTS

  1. An interesting dialogue is value comment. I feel that you should write extra on this subject, it might not be a taboo topic however generally persons are not enough to speak on such topics. To the next. Cheers

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