जानिए कौन थे सुंदरलाल बहुगुणा: चिपको आन्दोल के जनक जिन्होंने पेड़ों को बचाने के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया

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sundarlal bahuguna's story

वर्तमान की स्थिति से हम सब वाकिफ है, कोरोना महामारी के करना हमारा पूरा देश परेशान है, इस महामारी की वजह से बहुत सारे लोगो ने अपने प्राण गवा दिए, सुंदर लाल बहुगुणा को कौन नही जानता है उन्होंने पर्यावरण और सामज के लिए अपना कितना योगदान दिया है, परन्तु हमे ये बताते हुए बहुत दुःख हो रहा है कि अब वो हमारे बीच नही रहे। इस महामारी ने उनकी जान ले ली।

कोरोना से थे ग्रसित-

सुंदर लाल बहुगुणा प्रसिद्ध पर्यावरणवादी और चिपको आंदोलन के जनक थे, शुक्रवार को ऋषिकेश के एम्स अस्पताल में उनका निधन हो गया, उनकी आयु 94 वर्ष की थी, उनकी पत्नी विमला, दो बेटे और बेटी को इस बात का गहरा सदमा लगा है, साथ ही साथ पूरे देश को भी।

बहुगुणा जी कोरोना संक्रमित थे, 8 मई को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था क्योंकि उनके शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो गयी थी, जिसकी वजह से उनकी स्थिति बहुत खराब थी। और शुक्रवार को उन्होंने दम तोड़ दिया, उनका अंतिम संस्कार राजकीय संस्कार के साथ ऋषिकेश घाट पर कर दिया गया।

चिपको आंदोलन किया था शुरू-

सुंदरलाल बहुगुणा को पद्मविभूषण के साथ साथ कई सम्मानों से समान्नित किया गया था, 70 के दशक में उन्होंने ही चिपको आंदोलन की शुरुआत की थी, जंगलों की कटाई रोकने के लिए, टिहरी बांध के खिलाफ भी वो वर्षो तक लड़ते रहे और इसकी वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा। बहुगुणा जी महात्मा गांधी के समर्थक थे, पर्यावरण और हिमालय को लेके उन्होंने कई बार पदयात्राएं भी की है।


पूरा देश है शोक में –

बहुगुणा जी के निधन पर उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित पूरा देश शोक में है, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने ट्वीटर पर एक तश्वीर डाला है, जिनमे वो बहुगुणा जी को नींबू पानी पिला के उनका अनशन तोरवा रहे है, उन्होंने इस तश्वीर के बारे में लिखा है की ये उनके प्रधानमंत्री रहते हुए बेहतरीन पल में से एक है।

युवावस्था से ही सामाजिक कार्यो में थी रुचि-

बहुगुणा जी पर्यावरण प्रेमी, और चिपको आन्दोलन के जनक थे, बहुगुणा जी प्रतिभा के धनी थे जब वो गांधी जी के अनुनायी श्रीदेवी सुमन के संपर्क में आए तो युवावस्था से ही उनकी रुचि समाज कल्याण और पर्यावरण के संरक्षण के प्रति रही थी।

 

अनेकों अभियान चलाया-

बहुगुणा जी का योगदान समाज के लिए इतना है की उनके योगदान के लिए हम उन्हें नमन करते है, सबसे पहले बहुगुणा जी ने समाज से छुआछूत को हटाने के लिए आंदोलन की शुरुआत की, ताकि हरिजन समाज के लोग भी मंदिर में जा सके। उसके बाद टिहरी के पास शराब की दुकानों को बंद कराने के 16 दिन तक अनशन किया। 70 के दशक से उन्होंने पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर काम करना शुरू किया, बहुगुणा जी ने अपना सारा जीवन पर्यावरण को बचाने में लगा दिया, बहुगुणा जी का जन्म 9 जनवरी को उत्तराखंड के टिहरी जिले के मरोड़ा गांव में हुआ था।

 

बहुगुणा जी के पिता जी अंबा दत्त बहुगुणा टिहरी रियासत में वन अधिकारी थे। जब बहुगुणा जी की उम्र 18 वर्ष थी तब वो अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए लाहौर गए और वहाँ उन्होंने डीएवी कॉलेज में दाखिला लिया।जब वो 23 साल के थे यानी साल 1956 में उनका विवाह विमला देवी जी से हुआ, विवाह के बाद उन्होंने गांव में रहने का सोचा। जहाँ से उनका जीवन ही बदल गया।

कैसी हुई चिपको आंदोलन की शुरुआत-

70 के दशक में इस आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली के जंगलों से हुई, पेड़ो की कटाई के खिलाफ 26 मार्च 1974 को गढ़वाला के लता गांव में गौरा देवी के नेत्तृत्व में 27 महिलाओं ने इस आंदोलन की शुरुआत की, इस आंदोलन का मकसद व्यवसायिक लाभ के लिए पेड़ो की कटाई को रोकना था, जिसका अनोखा तरीका इन महिलाओं ने पेड़ से चिपक कर अपना मकसद साबित किया, जिससे पूरे देशभर में हलचल मच गई, और इसलिए इस आंदोलन का नाम चिपको आंदोलन पड़ा।

26 मार्च 1974 को 2400 पेड़ो की कटाई होनी थी जिसको रोकने के लिए पहले इन महिलाओं ने ठेकेदारों को बात करके समझाने की कोशिश की जब वो नही माने तब वो सब पेड़ से चिपक गयी और बोला कि पहले हमे काटो तब पेड़ को काटना, जिससे ठेकेदार डर के वापस चले गए।

उस समय वहाँ के उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा थे, जिन्होंने इस आंदोलन को गंभीरता से लिया और इस पर विचार करने के लिए एक कमिटी के गठन किया। क्योंकि ऐसा ही आंदोलन बाकी राज्यो में भी होने लगा, साल 1981 में बहुगुणा जी ने हिमालय पर 5 हज़ार किलोमीटर की पदयात्रा की, इसे देखते हुए उस समय की प्रधानमंत्री रही श्रीमती इंदिरा गांधी ने हिमालय के पेड़ों को नही काटने के लिए 15 सालों तक कि रोक लगा दी। इसके अलावा उन्होंने टिहरी बांध के लिए 84 दिनों का अनशन किया था।

 

बहुगुणा जी के निधन से पूरा देश ही शोक में है, समाज और पर्यावरण के लिए किए हुए उनके योगदान हमेशा याद किये जायेंगे, इस विपत्ति के घड़ी में पूरा देश बहुगुणा जी के परिवार के साथ खड़ा है।

अंजली पटना की रहने वाली हैं जो UPSC की तैयारी कर रही हैं, इसके साथ ही अंजली समाजिक कार्यो से सरोकार रखती हैं। बहुत सारे किताबों को पढ़ने के साथ ही इन्हें प्रेरणादायी लोगों के सफर के बारे में लिखने का शौक है, जिसे वह अपनी कहानी के जरिये जीवंत करती हैं ।

19 COMMENTS

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