खर्च के लिए कभी बेचने पड़े अखबार तो कभी एयरपोर्ट पर की सफाई, अब करोड़ों की कम्पनी के मालिक बन चुके हैं

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success journey of aamir qutub Founder & ceo of multi national digital farm enterprise monkey

किसी ने सही हीं कहा है कि, मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाता है। जी हाँ, आज हम बात करेंगे एक ऐसे शख्स की, जिसकी पढाई-लिखाई में कभी भी रुचि नहीं रही। इसके बावजूद भी उन्होंने अपने मेहनत और संघर्ष के बदौलत एक बड़ा मुकाम हासिल करते हुए बहुत कम उम्र में हीं करोड़ों रुपए टर्न ओवर वाली कंपनी के मालिक तक का सफर तय किया है।

तो आइए जानते हैं उस शख्स से जुड़ी सभी जानकारियां-

कौन है वह शख्स ?

हम बात कर रहे हैं आमिर कुतुब (Aamir Qutub) की, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ़ के रहने वाले हैं। उनकी उम्र लगभग 31 साल है। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता सरकारी नौकरी में कार्यरत थे तथा मां एक कुशल गृहिणी है। ऐसे तो उन्होंने कभी अपने मन से पढ़ाई नहीं की है, वह हमेशा हीं अपने मां-बाप के दबाव में पढाई किया करते थे।

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पढ़ाई-लिखाई में नही लगता था मन

शुरु से हीं उनका (Aamir Qutub) पढ़ाई-लिखाई में कोई रुचि नहीं रहती थी। उनके पिता की चाहत थी कि बेटा डॉक्टर या इंजीनियर बने। इसी दाबाव में उन्होंने इंटर के बाद बीटेक में प्रवेश ले लिया। पढ़ाई में वह काफी कमजोर थे, यहां तक कि एक बार तो टीचर ने उनसे यहां तक कह दिया कि तुम जिंदगी में कुछ नहीं कर पाओगे।

जैसे-तैसे पास की इंजीनियरिंग

12वीं के बाद उनका (Aamir Qutub) एडमिशन बीटेक में करवाया गया था। जहाँ उनके सारे दोस्त मैकेनिकल ब्रांच ले रहे थे, क्यूंकि ऐसा माना जाता है कि इस ब्रांच में सबसे ज़्यादा स्कोप होता है, इसलिए उन्होंने भी ये ही ब्रांच ले लिए। आमिर कहते हैं कि उनका मन पढ़ाई में बिलकुल भी नहीं लगता था। वह हमेशा इस दुविधा में रहते थे कि जो वे पढ़ रहे हैं वह कैसे आगे चलकर उनके लिए काम में आएगा। यह सब सोचकर वह हमेशा हताश हो जाते थे, जिसकी वजह से उनके मार्क्स भी कम आते थे।

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नौकरी भी की लेकिन नहीं हुई संतुष्टी

इंजीनियरिंग करने के बाद आमिर को पहली जॉब ऑफर हुई, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया और यहां होंडा कंपनी में उनकी जॉब लग गई, जहाँ कुछ समय तक उन्होंने काम किया। इन सबके बीच उन्हें अपना बिजनेस करने का सपना बार-बार याद आता रहा। उन्होंने नौकरी छोड़ी और फ्रीलांसिंग करने लगे। वह वेबसाइट डिजाइन करते थे। उनके कुछ क्लाइंट ऑस्ट्रेलिया व अमेरिका में भी थे।

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ऑस्ट्रेलिया जाने का बनाया मन

दिल्ली की नौकरी छोड़ने के बाद अमीर के कुछ दोस्तों ने यह सलाह दिया कि तुम विदेश जाकर अपना बिजनेस सेट करो। अपने दोस्तों की सलाह को मानकर आमिर स्टूडेंट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे और वहां के एक एमबीए कॉलेज में एडमिशन लिया।

अभी तक 170 कंपनीयों में किया अप्लाई

ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद अमीर ने एमबीए में दाखिला करवाया। इसके बाद उन्होंने पहले सेमेस्टर का फीस जैसे-तैसे जमा किया, दूसरे सेमेस्टर की फीस उनके लिए चुनौती बन गई। ऐसे में उन्होंने जॉब की तलाश करना शुरु कर दिया। जॉब के लिए उन्होंने करीब 170 कंपनियों में अप्लाई किया लेकिन कहीं भी नौकरी नहीं मिली। क्योंकि वो लोग भारत के एक्सपीरियंस को मान हीं नहीं रहे थे।

अखबार बेचे तथा स्लीपर का किया काम

तीन महीने की कोशिश के बाद भी नौकरी नहीं मिलने के बाद आमिर (Aamir Qutub) को एयरपोर्ट पर क्लीनिंग का काम मिल गया। इस काम के लिए उन्हें 20 डॉलर प्रतिघंटा मिलता था। दिन का जॉब होने के कारण उन्हें पढ़ने का समय नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद उन्होंने क्लीनिंग का काम छोड़ रात 3 बजे से सुबह 7 बजे तक घरों में अखबार डालने का काम करना शुरू किया।

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शुरु किया अपना कारोबार

नौकरी नहीं मिलने के कारण अमीर (Aamir Qutub) ने अपना बिजनेस शुरू करने का मन बनाया और काफी मेहनत के बाद आमिर किसी तरह ऑस्ट्रेलिया में अपनी कंपनी रजिस्टर्ड कर ली। लेकिन अब उनके सामने चुनौती क्लाइंट बनाने की थी। धीरे-धीरे सब कुछ नॉर्मल हो गया।

करोडों की है आमदनी

धीरे-धीरे हीं सही लेकिन आज के समय में आमिर (Aamir Qutub) की कंपनी काफी तरक्की कर चुकी है। यूं कहें तो उनका बिजनेस पुरी तरह से सेट हो गया है। आज चार देशों में उनकी कंपनी है, तथा उनका सलाना करीब 10 करोड़ का टर्नओवर है। उनके कंपनी में 100 परमानेंट कर्मचारी के साथ-साथ करीब 300 कॉन्ट्रेक्टर्स काम कर रहे हैं।

लोगों के लिए बने प्रेरणा

अपने प्रयासों से कभी हिम्मत नहीं हारने वाले अमीर (Aamir Qutub) ने यह साबित कर दिया कि सफलता कभी बेकार नहीं जाता है। जिस तरह उन्होंने इंजीनियरिंग करने के बाद भी तमाम तरह के मुसीबतों को झेला, क्लीनर और पेपर बांटने का भी काम किया और आज के समय में वे सफलता हासिल करते हुए चार देशों में काम करने वाली कंपनी के मालिक बन गए। उनकी यह सफलता आमजन के लिए एक प्रेरणा बनीं हुई हैं।

8 COMMENTS

  1. Kapıcı Murat: Oh yavrum, yerim bu götü diyip tokat attı Feyza’nın götüne.
    Kahkaha atarak yatakodasına geçti. Biraz bekledim ve bende girdim içeriye.
    Feyza’ya diz çöktürüp koca yarrağı ağzına vermiş
    şapur şupur emdiriyordu. Feyza bana bakıp ooohhh bi yarrak daha mı getirdin bana Murat,
    deyip gülümsedi.

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