दुर्घटना में पैर खो दी लेकिन हौसला नही टूटने दिया, व्हीलचेयर पर बैठकर पढ़ाई की और बनी डॉक्टर: मारिया बिजू

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Success story of doctor mariya biju

कामयाबी नाम है जुनून का, एक ऐसे जज्‍बे का जिसे किसी बैसाखी की जरूरत नहीं होती है। इस बात की मिसाल कई चुनिंदा शख्सियतों ने कायम की है, आज हम बात करेंगे एक ऐसे ही दिव्यांग लड़की की, जिन्होंने अपनी कामयाबी की कहानी अपने संघर्ष के बदौलत लिखी है और आज इसी संघर्ष के बदौलत लोगों लिए प्रेरणा बनीं हुई है।

कौन है वह दिव्यांग लड़की?

केरल (Kerala) की रहने वाली डॉ. मारिया बिजू (Dr. Mariya Biju) व्हीलचेयर बाउंड गर्ल हैं। जब बीजू 25 साल की थीं, तब एक दुर्घटना के दौरान वो पैरालाइज्ड हो गई थीं और उनके सीने से नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था। लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी से हार नहीं मानी बल्कि मुसीबतों का सामना किया और अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज वे एक काबिल डॉक्टर बन कर समाज में एक मिसाल कायम कर रहीं हैं।

Success story of doctor mariya biju

संघर्षशील है बिजू की कामयाबी की कहानी:-

दरअसल 2015 में बिजू (Dr. Mariya Biju) ने केरल के थोडूपुजा स्थित अल अजहर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स के लिए एडमिशन लिया था। बिजू के लिए वह बहुत खुशी का दिन था। 5 जून 2016 को मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में कपड़े सुखाने के लिए बालकनी में गईं और गीले फ्लोर होने के कारण उनका पैर फिसल गया।

बता दें कि, बीजू (Dr. Mariya Biju) फिसल कर सेकंड फ्लोर से नीचे गिर गईं थीं। नीचे गिरने से उनके गले की वर्टिब्रा और जांघ की हड्‌डी टूट गई। इससे गर्दन के नीचे का हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया। उसके बाद उनकी सर्जरी हुई और उन्हें चार महीने तक रिहैबिलिटेशन थैरेपी के लिए वैल्लोर के सीएमसी में रखा गया। लंबा समय अस्पताल में बिताने के बाद वे एक बार फिर हिम्मत करके उठीं और कॉलेज जाने लगी।

बिजू (Dr. Mariya Biju) के अनुसार, ऑपरेशन के बाद का समय उनके लिए बहुत मुश्किल था। उन्हें अपनी उंगलियों में सेंसेशन महसूस करना था ताकि वो एग्जाम में लिख सके। लेकिन इतना लिख पाना उनके लिए असंभव था। हालांकि यूनिवर्सिटी ने उनकी हालत को देखते हुए उन्हें अपने पेपर किसी और से लिखवाने की अनुमति दे दी थी। उन्होंने अपना पेपर किसी दूसरे मेडिकल स्टूडेंट से लिखवाया और खुद को एक बार फिर पूरी तरह ठीक करने में समय बिताया। आगे उन्होंने खुद से लिखने की कोशिश जारी रखा और बाद में वो विकलांगता को हराकर डॉक्टर बन गई।

Success story of doctor mariya biju

लोगों के लिए बनी प्रेरणा

पढ़ाई के दौरान विकलांग होने के बावजूद भी अपने मिशन में लगे रहने वाली मारिया बिजू (Dr. Mariya Biju) ने अपने लक्ष्य के प्राप्ति के लिए कईं तरह की बाधाओं का सामना किया है। खास बात यह है कि, वे पढ़ाई के दौरान हीं अपाहिज हुई ,लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं बदला और अन्ततः उन्होंने यह साबित कर दिया है कि तमाम बाधाओं के बावजूद भी अगर सही इच्छा शक्ति हो तो कामयाबी जरूर मिलेगी।

1 COMMENT

  1. Au revoir”, modern Fransızcada “veya voar” olarak telaffuz edilir. “E” harfini telaffuz etmek kendi başına bir hata değildir, ancak günümüzde çoğu insan bunun üzerinden geçip gidecektir. Durum ne olursa olsun, “Au revoir” her zaman işe yarar, yani hatırlanması gereken bir kelime varsa, o da budur.

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