पहाड़ी महिलाओं ने किया स्वयं सहायता समूह का गठन, अब बचत के पैसे से कर रही बेटियों की शादियां

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women living in mountain areas built self help group

कहते हैं, जहां चाह वहां राह। यह कहावत फतेहगंज की रहने वाली मीरा ने सच साबित कर दिखाया है। मीरा एक ऐसे जंगल और पहाड़ों के बीच रहने वाली महिला है, जहां रोजगार की किल्लत बनी रहती है। ऐसे में मीरा ने अपनी सोच और मेहनत से प्रेरणा नाम के साबुन (Soap) का निर्माण किया है। आपको बता दें कि इस निर्माण ने मीरा का पूरी दुनिया ही बदल दिया। आइए जानते हैं मीरा की दिलचस्प कहानी।

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शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह का किया गठन

फतेहगंज को मिनी पाठा भी कहते है। आपको बता दें कि यहां रोजगार के रुप में मात्र खेती ही कड़ते है और वो भी कुछ ही लोग कर पाते है। इस गांव में लगभग सभी लोगों को अपनी आजीविका चलाने में बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है परंतु मीरा ने इन परिस्थितियों से बाहर निकलने का निर्णय लिया और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर साल 2016-17 में शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया।

कैसे हुई शुरुआत?

मीरा ने अपनी बिजनेस की शुरुआत करीब चार साल पहले की थी। इन्होंने इसके लिए 20 हजार रुपए का कर्ज लिया था। इसके बाद उन्होंने महिलाओं का एक समूह बनाया और उनके साथ मिलकर अपने कार्य की शरुआत की। कोरोना काल के दौरान उन्होंने अपने घर में ही सामूहिक रूप से ( कुटीर उद्योग) कार्य किया और सफल हुई। उनका कहना है कि जहां पहले घर खर्च भी चलाना मुश्किल हो जाता था परंतु आज हम सभी अपने परिवार के साथ मिलकर खुशी से जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

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खुब होती है बिक्री

मीरा का कहना है कि वे फिलहाल दो प्रकार के साबुन का निर्माण करती है, पहला एलोवेरा मिक्स करके और दूसरा गुलाब की खुशबू वाला। इनकी बनाई हुई साबुन को लोग खुब पसंद करते हैं। हर रोज़ पांच से दस गत्ता साबुन की पैकिंग की जाती हैं।

प्रत्येक महीने लगभग 50 हजार रुपए का होता है मुनाफा

मीरा ने बताया कि साबुन बनाने वाले कार्य के लिए छः महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस बिजनेस से वे प्रत्येक महीने में लगभग 50 हजार रुपए मुनाफा कमा लेती है।

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बचत के पैसे से होती है शादियां

मीरा ने बताया कि इनके सदस्य बचत कर फंड भी इकट्ठा किए हैं जिसमें लगभग डेढ़ से दो लाख रुपए हमेशा ही उपल्ब्ध रहती है। इन रकम से समूह की सभी महिलाएं अपने लड़के-लड़कियों की शादियां, बीमारी आदि जरुरी कामों के लिए खर्च करती है। ऐसे करने से कभी उन्हें दूसरी के सामने हाथ नही फैलाना पड़ता है। कम चल जाने पर उस रकम को फिर से वापस रख दिया जाता हैं।

आत्मनिर्भरता का मिसाल कायम करते हुए मीरा और उनकी साथी महिलाओं ने एक जंगली इलाके में रहते हुए जो कर दिखाया वह वाकई प्रेरणादायक है।

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