Cyclopean wall : बिहार में मौजूद है चीन की दीवार से भी अधिक पुरानी दीवार, जानिए इस अनोखे दीवार की अनसुनी बातें

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world heritage sites Cyclopean wall of Rajgir, bihar

अभी तक हम सभी ने दुनिया के सात अजूबों में शामिल “द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना” जिसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है, का नाम ही सुने थे। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत (India) के बिहार (Bihar) राज्य में भी चीन की दीवार से भी पुरानी एक ऐसी अनोखी दीवार है, जिसे UNESCO से वर्ल्ड हेरिटेज साईट (विश्व धरोहर) का दर्जा भी प्राप्त है।

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बिहार में स्थित है यह दीवार

 

बिहार (Bihar) के नालंदा पहाड़ियों पर स्थित इस दीवार को साइक्लोपीयन वॉल (Cyclopean wall of Rajgir) कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह चीन की दीवार से भी काफी पुरानी दीवार है और इसे इंजीनियरों का एक बेजोड़ नमूना माना जाता है।

 

इस दीवार को “मौर्य साम्राज्य” ने अपनी सुरक्षा के लिए बनवाया गया था और यह 18 शताब्दी पुरानी दीवार है। वर्ष 1987 में इसे विश्व धरोहर के रूप में माना गया। प्रतिवर्ष इसे देखने के लिए हजारों से अधिक संख्या में यहां लोग आते हैं।

 

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साइक्लोपीयन वॉल का इतिहास

मौर्य साम्राज्य वंश के शासकों ने बाहरी आक्रमणकारियों से राजधानी की सुरक्षा करने के लिए इस दीवार का निर्माण करवाया था। इसीलिए इसे मौर्य साम्राज्य की विरासत के रूप में माना जाता है। मगध के उस दौर में राजगीर बहुत ही समृद्ध हुआ करता था, जिसकी वजह से वहां आक्रमण का खतरा बना रहता था। उसी दौरान राजगीर के राजा बिंबिसार और उनके पुत्र अजातशत्रु के द्वारा इस दीवार को बनवाया गया था।

 

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आपको बता दें कि ‘पाली ग्रंथ’ में भी इस दीवार के होने का जिक्र किया गया है। चीन की दीवार की तरह ही इस दीवार में भी हर 5 गज की दूरी पर सैनिक मौजूद रहते थे। शहर के किले बंद हो जाने के बाद इस में प्रवेश करने के लिए अलग-अलग दरवाजों से ही इसमें प्रवेश किया जा सकता था।

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क्यों है इंजीनियरों का अनोखा नमूना

 

40 मीटर लंबी और 4 मीटर उंचाई वाले इस दीवार को चूना पत्थर का प्रयोग करके बनवाया गया है। हालांकि वर्तमान में इस दीवार के अवशेष ही रह गए हैं, लेकिन फिर भी यह एक इंजिनीयरों की एक बेजोड़ दास्तां है।

दीवार में मजबूती रहे और आक्रमण से भी बचा जा सके इसके लिए इस दीवार के बाहरी हिस्से में बड़े पत्थरों का तथा बीच में छोटे पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। यह दीवार विश्व भर के मिसीनियन आर्किटेक्चर के कुछ हिस्सों में से एक है।

 

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कैसे जाएं इस दीवार तक?

यह दीवार राजगीर स्टेशन से 7 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां जाने के लिए स्टेशन से ऑटो की सहायता से आधे घंटे में पहुंचा जा सकता है। यहां की एक खास बात यह है कि यहां जाने के लिए कोई भी एंट्री फीस नहीं लगता है। यहां आप सुबह 6:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक दीवार का दीदार करने के लिए जा सकते हैं। -Cyclopean wall of Rajgir

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